नोएडा: नोएडा प्राधिकरण में विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में एक तरफ ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ उन स्थानों पर भी काम कराए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत दिखाई नहीं देती। कहीं इंटरलॉकिंग टाइलों को उखाड़कर दोबारा लगाने का काम हो रहा है, तो कहीं ठीक स्थिति वाले डिवाइडरों की मरम्मत कराकर नए कार्यों के रूप में पेश किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पैचवर्क से काम चल सकता है, लेकिन वहां भी सड़क की रीसरफेसिंग कराई जा रही है।
इन परिस्थितियों ने नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किलों की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों के चयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या शहर में विकास कार्यों की प्राथमिकताएं वास्तव में जनता की जरूरतों के आधार पर तय की जा रही हैं या फिर उपलब्ध बजट खर्च करने के लिए ऐसे काम चुने जा रहे हैं, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं है? हालांकि, सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि के लिए संबंधित टेंडरों, कार्यादेशों, भुगतान और मौके पर हुए काम की तकनीकी जांच जरूरी है।
जहां सड़कें बदहाल, वहां वर्क सर्किल के अधिकारियों का ध्यान क्यों नहीं?
नोएडा के अलग-अलग इलाकों में सड़कों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर सड़क की सतह खराब होने, गड्ढे बनने और वाहन चालकों को परेशानी होने की शिकायतें हैं। इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि जिन सड़कों पर तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम क्यों नहीं कराया जाता?
सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाले संबंधित वर्क सर्किलों से यह पूछा जाना चाहिए कि उनके क्षेत्र में खराब सड़कों की पहचान कैसे की जाती है। क्या नियमित निरीक्षण के आधार पर सड़कों की सूची तैयार होती है? क्या गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों को प्राथमिकता दी जाती है? और यदि किसी सड़क की हालत लंबे समय से खराब है, तो उसके सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
शहर में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करते समय सबसे पहले उन स्थानों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जहां नागरिकों को वास्तविक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि बदहाल सड़कों की अनदेखी करते हुए अपेक्षाकृत ठीक सड़कों पर काम कराया जा रहा है, तो इसकी वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
इंटरलॉकिंग टाइलों को उखाड़कर दोबारा लगाने की जरूरत क्या है?
नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में इंटरलॉकिंग टाइलों को हटाकर दोबारा लगाने के काम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि टाइलें टूटी हुई हैं, जमीन धंस गई है या पैदल चलने वालों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, तो उनकी मरम्मत करना जरूरी है। लेकिन यदि टाइलें पहले से ठीक स्थिति में हैं और उन्हें बिना स्पष्ट तकनीकी आवश्यकता के दोबारा लगाया जा रहा है, तो काम की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ऐसे कार्यों में यह देखना जरूरी है कि टाइलें बदलने या दोबारा लगाने की वजह क्या है, संबंधित कार्य का अनुमान किस आधार पर तैयार किया गया और उसकी गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की। यदि किसी स्थान पर मामूली सुधार से समस्या हल हो सकती है, तो पूरे हिस्से को दोबारा बनाने का निर्णय तकनीकी आधार पर उचित ठहराया जाना चाहिए।
सार्वजनिक धन से होने वाले हर कार्य का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधा देना होना चाहिए। केवल काम दिखाई देने से विकास की गुणवत्ता साबित नहीं होती, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि उस काम से जनता को कितना लाभ मिला।
ठीक डिवाइडरों की मरम्मत और सड़क की रीसरफेसिंग पर सवाल
शहर के कुछ हिस्सों में डिवाइडरों की मरम्मत और सड़कों की रीसरफेसिंग जैसे कार्यों की प्राथमिकता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि डिवाइडर क्षतिग्रस्त हैं, उनकी सुरक्षा प्रभावित हो रही है या सड़क की सतह खराब हो चुकी है, तो मरम्मत और रीसरफेसिंग जरूरी हो सकती है। लेकिन जहां सड़क की हालत संतोषजनक है और मामूली पैचवर्क से काम चल सकता है, वहां व्यापक स्तर पर काम कराने की आवश्यकता का तकनीकी आधार सामने आना चाहिए।
सड़क की रीसरफेसिंग का निर्णय सड़क की वास्तविक स्थिति, यातायात के दबाव, सतह के क्षरण और इंजीनियरिंग निरीक्षण के आधार पर होना चाहिए। इसी तरह डिवाइडर की मरम्मत भी उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार की जानी चाहिए।
यदि प्राधिकरण के पास किसी सड़क पर खर्च करने के लिए बजट उपलब्ध है, तो इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि उस सड़क पर काम कराना ही प्राथमिकता बन जाए। पहले यह तय होना चाहिए कि शहर में किन स्थानों पर सबसे अधिक जरूरत है और सीमित संसाधनों का उपयोग कहां करने से जनता को अधिक लाभ मिलेगा।
क्या बजट खर्च करने के लिए निकाले जा रहे हैं टेंडर?
नोएडा प्राधिकरण में विकास कार्यों के चयन और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या प्रत्येक परियोजना की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जा रहा है। किसी काम का टेंडर निकलना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसी तरह किसी सड़क की रीसरफेसिंग या इंटरलॉकिंग टाइलों की मरम्मत को केवल देखकर सरकारी धन की बर्बादी भी नहीं कहा जा सकता।
लेकिन यदि एक ही तरह के काम बार-बार कराए जा रहे हैं, बिना पर्याप्त कारण के अच्छी स्थिति वाली सुविधाओं को दोबारा बनाया जा रहा है और दूसरी ओर जरूरी मरम्मत लंबित है, तो ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए।
इसके लिए प्राधिकरण को संबंधित परियोजनाओं के टेंडर, अनुमानित लागत, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान और काम पूरा होने की रिपोर्ट का परीक्षण करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण भी कराया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च किए गए धन से वास्तविक सुधार हुआ है या नहीं।
वर्क सर्किल प्रभारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी
नोएडा में अलग-अलग क्षेत्रों के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार वर्क सर्किलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रत्येक क्षेत्र में खराब सड़कों, क्षतिग्रस्त फुटपाथों, डिवाइडरों और अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति का नियमित आकलन होना चाहिए।
यदि किसी क्षेत्र में सड़कें लंबे समय से खराब हैं, जबकि दूसरे स्थानों पर कम प्राथमिकता वाले कार्य कराए जा रहे हैं, तो संबंधित अधिकारियों से इसकी वजह पूछी जानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने, तकनीकी मंजूरी देने और काम की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है।
जवाबदेही का अर्थ केवल किसी अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि रिकॉर्ड और तकनीकी तथ्यों के आधार पर यह तय करना है कि निर्णय सही था या नहीं। इससे अनावश्यक खर्च की आशंका कम होगी और नागरिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान भी प्राथमिकता से हो सकेगा।
सीईओ को करानी चाहिए विकास कार्यों की प्राथमिकताओं की समीक्षा
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के स्तर पर विकास कार्यों की प्राथमिकताओं की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके तहत शहर की खराब सड़कों और लंबित मरम्मत कार्यों की सूची तैयार कराई जा सकती है। साथ ही, हाल में कराए गए रीसरफेसिंग, इंटरलॉकिंग टाइलों और डिवाइडर मरम्मत के कार्यों की जरूरत तथा गुणवत्ता का परीक्षण किया जा सकता है।
ऐसी समीक्षा में कुछ अहम सवालों के जवाब तलाशे जाने चाहिए:
- किन सड़कों पर तत्काल मरम्मत की जरूरत है और उनका काम कब तक पूरा होगा?
- अच्छी स्थिति वाली सड़कों पर रीसरफेसिंग कराने का तकनीकी आधार क्या था?
- इंटरलॉकिंग टाइलों और डिवाइडरों पर दोबारा खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- संबंधित परियोजनाओं की लागत और गुणवत्ता की जांच किसने की?
- क्या सभी कार्यों का चयन जनता की जरूरत और तकनीकी आकलन के आधार पर किया गया?
इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड के आधार पर सामने आने से यह समझने में मदद मिलेगी कि प्राधिकरण का बजट नागरिकों की समस्याओं को हल करने में कितना प्रभावी साबित हो रहा है।
जनता को चाहिए बेहतर सड़कें, न कि केवल दिखाई देने वाले विकास कार्य
नोएडा के नागरिक प्राधिकरण से बेहतर सड़कें, सुरक्षित फुटपाथ, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान और समय पर मरम्मत की उम्मीद करते हैं। विकास कार्यों की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि लोगों की समस्याएं कितनी कम हुईं, न कि शहर में कितनी जगह निर्माण या मरम्मत का काम दिखाई दिया।
यदि खराब सड़कों की समस्या बनी रहती है और दूसरी ओर ऐसे स्थानों पर भी खर्च होता है जहां तत्काल काम की आवश्यकता स्पष्ट नहीं है, तो प्राधिकरण को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए।
अब जरूरत इस बात की है कि नोएडा प्राधिकरण शहर में चल रहे विकास कार्यों का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन कराए। जिन कार्यों की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए और जहां खर्च की उपयोगिता पर सवाल हैं, वहां दस्तावेजों के आधार पर जांच की जाए।
बड़ा सवाल यही है कि नोएडा प्राधिकरण के विकास कार्यों का पैमाना आखिर क्या है—जनता की जरूरत या केवल बजट खर्च करना? इस सवाल का जवाब संबंधित अधिकारियों की समीक्षा, परियोजनाओं के रिकॉर्ड और मौके पर होने वाले तकनीकी निरीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगा।

