नोएडा-ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा रामभरोसे: कहीं प्लास्टर तो कहीं फायर सिस्टम फेल

नोएडा/ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटे आलीशान और गगनचुंबी इमारतों वाले क्षेत्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) में रहने वाले लाखों फ्लैट खरीदारों का ‘सपनों का घर’ अब उनके लिए डर का सबब बनता जा रहा है। पिछले कुछ समय से यहां की हाईराइज सोसायटियों से आ रही खबरें निर्माण गुणवत्ता (Construction Quality), मेंटेनेंस और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) की CRC सब्लिमिस (CRC Sublimis) सोसाइटी से सामने आया है, जहां रहने वाले लोग बिल्डर की लापरवाही के कारण खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।

CRC सब्लिमिस सोसाइटी: आसमान से बरस रही ‘मौत’, सहमे निवासी

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रतिष्ठित मानी जाने वाली CRC सब्लिमिस सोसाइटी के निवासियों को इन दिनों अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा की भारी चिंता सताने लगी है। निवासियों के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में सोसाइटी के भीतर एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार निर्माणाधीन टावरों से भारी-भरकम और मोटे-मोटे लोहे के सरिए (Iron Rods) सीधे नीचे गिर चुके हैं।

निवासियों का दर्द: “सोसाइटी के कॉमन एरिया और वॉकवे पर जहां बच्चे खेलते हैं और लोग टहलते हैं, वहां अचानक भारी सरिए गिर रहे हैं। यह सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ है। अगर कोई सरिया किसी के ऊपर गिर जाए, तो उसकी जान बचना नामुमकिन है। बिल्डर सुरक्षा नेट (Safety Netting) लगाने में पूरी तरह नाकाम रहा है।”

लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और उन्होंने मैनेजमेंट व स्थानीय प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दिखावा साबित हो रहे फायर फाइटिंग सिस्टम

नोएडा-ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों में आग लगने की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाला और डरावना पहलू यह है कि जब भी किसी फ्लैट या टावर में आग लगती है, तो वहां लगे करोड़ों रुपये के फायर फाइटिंग उपकरण (Fire Extinguishers & Sprinklers) केवल ‘शोपीस’ या दिखावा साबित होते हैं।

विभिन्न सोसायटियों से मिली रिपोर्टों के अनुसार:

  • फायर अलार्म का न बजना: आग लगने पर ज्यादातर सोसायटियों के ऑटोमैटिक अलार्म सिस्टम काम ही नहीं करते।
  • पानी का दबाव कम होना: टावरों में लगे फायर हाइड्रेंट में या तो पानी नहीं होता, या फिर प्रेशर इतना कम होता है कि आग बुझाना असंभव हो जाता है।
  • एक्सपायरी डेट के उपकरण: कई सोसायटियों में आग बुझाने वाले सिलेंडर रीफिल ही नहीं किए गए हैं और वे सालों से एक्सपायर्ड पड़े हैं।

कहीं गिर रहा प्लास्टर, कहीं सीलन से खोखली हो रही बुनियाद

सुरक्षा का संकट सिर्फ गिरते सरियों या आग तक सीमित नहीं है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई सोसायटियों (जैसे सुपरटेक, आम्रपाली की पुरानी सोसायटियों और कई नए प्रोजेक्ट्स) से लगातार छतों और दीवारों का प्लास्टर गिरने की खबरें आती रहती हैं।

  • घायल हो रहे लोग: बेसमेंट, लिफ्ट एरिया और बालकनी से प्लास्टर गिरने के कारण अब तक कई बुजुर्ग, बच्चे और सुरक्षाकर्मी घायल हो चुके हैं। कुछ मामलों में तो खड़ी गाड़ियां मलबे में तब्दील हो चुकी हैं।
  • बिल्डिंग में सीलन (Dampness): घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के कारण पहली ही बारिश में बेसमेंट और फ्लैटों की दीवारों में भयानक सीलन आ जाती है। यह सीलन धीरे-धीरे बिल्डिंग के पिलर्स और कंक्रीट को अंदर से खोखला कर रही है, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

अथॉरिटी और बिल्डर के गठजोड़ पर उठ रहे सवाल

करोड़ों रुपये खर्च करके घर खरीदने वाले लोगों का कहना है कि पजेशन (Possession) देते समय बिल्डर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन असलियत में निर्माण की गुणवत्ता बेहद घटिया होती है। इसके अलावा, नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी भी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) देने से पहले मौके पर जाकर सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच नहीं करते, जिससे बिल्डरों के हौसले बुलंद हैं।

निवासियों की मांग:

  1. CRC सब्लिमिस और अन्य सोसायटियों में निर्माणाधीन साइट्स पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ और नेट लगाए जाएं।
  2. सभी सोसायटियों का ‘थर्ड पार्टी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी ऑडिट’ और ‘फायर ऑडिट’ कराया जाए।
  3. लापरवाही बरतने वाले बिल्डरों और मेंटेनेंस एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन और बिल्डरों ने इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ये हाईराइज सोसायटियां किसी बड़े हादसे की गवाह बन सकती हैं।

 

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