पुणे की विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में मासूम बच्ची की दरिंदगीपूर्ण हत्या के दोषी भीमराव कांबले को मृत्युदंड की सजा सुनाई, मामले की तेज सुनवाई पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बनी रही
पुणे की विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के दोषी 65 वर्षीय व्यक्ति को सोमवार को मौत की सजा सुना दी। इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि घटना के महज दो महीने के भीतर पूरी सुनवाई प्रक्रिया पूरी हो गई और अदालत ने दोषी को सभी आरोपों में सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी को पहले ही सभी आरोपों में दोषी ठहरा दिया था और आज सजा का ऐलान किया गया।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 1 मई 2026 (महाराष्ट्र दिवस) को पुणे जिले के भोर तालुका स्थित नसरापुर क्षेत्र में हुई थी, जिसने पूरे महाराष्ट्र में भारी आक्रोश पैदा कर दिया और जगह-जगह प्रदर्शन व सड़कें जाम होने लगीं। बच्ची गर्मी की छुट्टियों में अपनी दादी के घर पुणे आई हुई थी। घटना के दिन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वह अपनी दादी के घर के बाहर खेल रही थी, जब पड़ोसी गांव के खेतिहर मजदूर भीमराव प्रभाकर कांबले (65) ने उसे नाश्ता खिलाने और नवजात बछड़ा दिखाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले लिया। सीसीटीवी फुटेज में कांबले बच्ची को हाथ पकड़कर घर से लगभग 700 मीटर दूर एक गौशाला की ओर ले जाते हुए नजर आया।
गौशाला के भीतर उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक यौन कृत्य किया, इसके बाद कपड़े से मुंह दबाकर और पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी, फिर शव को गोबर के नीचे छिपाने की कोशिश की। शाम करीब साढ़े पांच बजे जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिवार ने तलाश शुरू की और स्थानीय सीसीटीवी की मदद से शव बरामद हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने सीसीटीवी सबूत और स्थानीय जानकारी के आधार पर उसी दिन कांबले को गिरफ्तार कर लिया।
15 दिन में चार्जशीट, 55 दिन में फैसला
पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल की अगुवाई में बनी विशेष जांच टीम ने महज 15 दिनों के भीतर 55 से अधिक गवाहों के बयानों के साथ 1,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फास्ट-ट्रैक सुनवाई और मृत्युदंड दिलाने का भरोसा दिया था। सुनवाई 21 मई 2026 से शुरू हुई और पीड़िता के परिवार की पहचान सुरक्षित रखने के लिए कार्यवाही बंद कमरे में (इन-कैमरा) चलाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय मिसार ने मामले की पैरवी की। मिसार ने बताया कि अभियोजन ने अपहरण, छेड़छाड़, बलात्कार और हत्या समेत पॉक्सो की कई धाराओं में लगाए गए सभी आरोप साबित कर दिए। आरोपी ने अपराध से इनकार करते हुए दावा किया था कि बछड़ा दिखाते समय फिसलने से बच्ची को चोट लगी, लेकिन सबूतों ने इस दावे को झूठा साबित कर दिया।
“दुर्लभतम अपराध” अभियोजन की दलील
अभियोजन पक्ष ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी दुर्लभतम श्रेणी का अपराध साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले थे और बताया गया कि उसे लगातार 39 मिनट तक प्रताड़ित किया गया।
अभियोजन पक्ष ने कांबले के सुधार की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए तर्क दिया कि वह एक खतरनाक अपराधी है। सरकारी वकील ने बताया कि कांबले पर इससे पहले एक 62 वर्षीय महिला, एक 17 वर्षीय लड़की और एक जानवर से जुड़े मामलों में भी आरोप लग चुके हैं, और ऐसा व्यक्ति समाज के लिए खतरा है। रिकॉर्ड के अनुसार, कांबले पर 1998 में छेड़छाड़ का आरोप लगा था जिसमें वह बरी हो गया था, जबकि 2015 में एक नाबालिग रिश्तेदार से जुड़ी शिकायत बाद में वापस ले ली गई थी।
बचाव पक्ष ने उम्र का दिया हवाला
दूसरी ओर बचाव पक्ष ने मृत्युदंड से बचने की कोशिश की। बचाव पक्ष के वकीलों ने कांबले की 65 वर्ष की बढ़ी उम्र और अपराध से इनकार को हल्की सजा के आधार के रूप में पेश करते हुए दो पुराने मामलों के हवाले भी अदालत में दिए। सुनवाई के दौरान जब अदालत ने कांबले से उसकी सजा पर राय पूछी, तो उसने पहले की तरह खुद को निर्दोष बताते हुए इसे एक दुर्घटना करार दिया।
सजा की प्रक्रिया और आखिरी फैसला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मृत्युदंड के मामलों में आरोपी को कम करने वाली परिस्थितियां (mitigating circumstances) पेश करने का मौका दिया जाता है, और अदालत ने इस पर भी विस्तृत सुनवाई की। इसके बाद अदालत ने जेल और परिवार से जुड़ी रिपोर्ट्स तथा दोनों पक्षों के हवाले गए मामलों के अध्ययन के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कांबले को मृत्युदंड की सजा दी। न्यायाधीश सालुंखे की अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दोषी पर लगे अपराधों में से दो में मृत्युदंड और दो में उम्रकैद का प्रावधान कानून के तहत मौजूद है।
विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद महाराष्ट्र भर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। ग्रामीणों ने पुणे-बेंगलुरु और पुणे-सतारा हाईवे जाम कर दिए, मौन जुलूस निकाले और नसरापुर में बंद का आयोजन किया। प्रदर्शन पुणे के अन्य हिस्सों में भी फैल गए, जहां सख्त सजा और बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहतर इंतजाम की मांग उठी। स्थानीय विधायकों और विपक्षी नेताओं समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने इलाके का दौरा करते हुए न्याय की मांग की थी।

