नयी दिल्ली / ढाका, सऊदी अरब में मक्का के पवित्र मस्जिद अल-हराम में “अनैतिक कृत्य” (immoral acts / indecent acts) के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों – नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और स्वीटी (सीती) अख्तर – को 14 अक्टूबर 2026 को फांसी दे दी गई। सऊदी अधिकारियों ने उन्हें ताज़ीर (ta’zir) कानून के तहत मौत की सजा सुनाई थी, जिसमें जज को अपराध और सजा तय करने का अधिकार होता है। फांसी से पहले बांग्लादेश सरकार या परिवारों को कोई सूचना नहीं दी गई। दोनों परिवारों और ढाका को खबर मीडिया और सोशल मीडिया से मिली।
बांग्लादेश के जेद्दा में स्थित वाणिज्य दूतावास के एक गोपनीय मेमो (द डेली स्टार द्वारा प्राप्त) के अनुसार, दोनों अल-मजल कंपनी में क्लीनर के रूप में काम करते थे। नजरुल को 1 अगस्त 2023 को साइबर क्राइम कानून के तहत और स्वीटी को अगले दिन व्यभिचार के आरोप में हिरासत में लिया गया था। परिवारों का कहना है कि वे एक-दूसरे को नहीं जानते थे और आरोप साजिश का हिस्सा हैं। सऊदी अधिकारियों ने अभी तक विस्तृत सबूत या घटना का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। बांग्लादेश सरकार ने रियाद से अदालती फैसले, आरोपों का ब्यौरा और सूचना न देने का कारण मांगा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर फैल रहा पाकिस्तानी प्रचार
फांसी के एक हफ्ते बाद सोशल मीडिया (खासकर एक्स और फेसबुक) पर लगभग एक जैसी पोस्ट्स तेजी से फैल रही हैं। ये पोस्ट्स मूल रूप से पाकिस्तानी अकाउंट्स से शुरू हुईं और बांग्लादेश, नाइजीरिया तथा अफगानिस्तान समेत कई देशों में कॉपी-पेस्ट हो रही हैं। इनमें दावा किया गया है कि:
– नजरुल और स्वीटी ने मस्जिद अल-हराम के गेट 85-87 के बीच एक सुनसान कमरे में व्यभिचार किया।
– नजरुल ने एक भारतीय दोस्त को पहरे पर बिठाया, जिसने वीडियो बना लिया।
– भारतीय युवक ने खुद संबंध बनाने की कोशिश की, असफल होने पर वीडियो वायरल कर दिया।
– सऊदी पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया। भारतीय को 20 साल की सजा हुई, जबकि दोनों बांग्लादेशियों को मौत की सजा।
ये दावे पूरी तरह असत्यापित हैं। सऊदी सरकार या किसी आधिकारिक स्रोत ने भारतीय युवक की गिरफ्तारी या सजा का कोई जिक्र नहीं किया। India Today की रिपोर्ट के अनुसार, ये पोस्ट्स पाकिस्तानी व्यक्तियों द्वारा पहले साझा की गईं और बाद में व्यापक रूप से फैलाई गईं। कुछ पोस्ट्स में “केवल माथे पर चुंबन” वाली अफवाह को भी झूठा बताया गया है, लेकिन मूल सच्चाई अभी भी अस्पष्ट है।
क्या है आधिकारिक स्थिति?
सऊदी इंटीरियर मिनिस्ट्री ने सिर्फ इतना कहा कि दोनों ने मक्का की मस्जिद में अनैतिक कृत्य किया, जिससे मस्जिद की पवित्रता भंग हुई। सजा को “उदाहरण” के रूप में बताया गया। बांग्लादेश में तीन मिलियन से ज्यादा प्रवासी काम करते हैं और यह मामला उनके कल्याण को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। ढाका ने कहा है कि वाणिज्य दूतावास को कैदियों की सूची तो मिली थी, लेकिन मौत की सजा का कोई जिक्र नहीं था।परिवारों का आरोप है कि नजरुल पाकिस्तानी सहकर्मी की साजिश का शिकार हुआ, जबकि स्वीटी को सहकर्मियों द्वारा अवैध कार खरीदने के आरोप में फंसाया गया। ये दावे भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
सवाल बाकी
रियाद ने फांसी से पहले ढाका को क्यों नहीं बताया? बांग्लादेश, जो हिरासत की जानकारी रखता था, ने समय रहते कूटनीतिक हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? और सोशल मीडिया पर भारतीय युवक को निशाना बनाने वाली असत्यापित कहानियां क्यों फैलाई जा रही हैं? ये सवाल अभी जवाब की मांग करते हैं। सऊदी अरब में 2025 में 300 से ज्यादा फांसी हुईं। गैर-हिंसक आरोपों में मौत की सजा और सूचना की कमी ने इस मामले को और विवादास्पद बना दिया है। बांग्लादेश सरकार अभी भी आधिकारिक दस्तावेज मांग रही है।
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