नई दिल्ली, मंगलवार को दिल्ली में विपक्ष का चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च पुलिस बैरिकेडिंग में फंस गया था। संसद से निर्वाचन सदन तक का रास्ता भारी सुरक्षा घेरे में था। लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर अपना नया ‘धप्पा’ दिखाया। पुलिस जब नेताओं को बसों में बैठाकर हिरासत में ले जा रही थी, तभी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अचानक आकाशवाणी भवन की ओर रुख कर लिया। दोनों भाई-बहन आकाशवाणी परिसर में घुस गए और पेड़ के नीचे बैठकर 8 घंटे का धरना दे दिया। यह कांग्रेस के CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) में कथित गड़बड़ियों के विरोध का हिस्सा था। कांग्रेस ने इस सरप्राइज मूव को सोशल मीडिया पर ‘धप्पा’ कैप्शन के साथ वीडियो शेयर कर दावा किया।
तीसरी बार फ्लैश प्रोटेस्ट
यह पिछले दो महीनों में राहुल गांधी का तीसरा अचानक धरना है, जिसमें उन्होंने पुलिस और कई बार अपने ही पार्टी नेताओं को भी चौंका दिया:
1. 21 जुलाई 2026: छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के एक दिन बाद राहुल गांधी ने अचानक प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरना दे दिया। नेताओं को मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन के बहाने बुलाया गया था, फिर वहां से मार्च शुरू कर दिया गया। पुलिस ने राहुल को घसीटकर हिरासत में लिया, जिसमें उनकी नाक से खून निकला।
2. 21 अगस्त 2026: राहुल गांधी 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब (जिन पर जुलाई प्रदर्शन में पेलेट गन से चोट का आरोप) को लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और FIR दर्ज कराने की मांग की। 7 घंटे के धरने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।
3. 6 अक्टूबर 2026: आकाशवाणी भवन में 8 घंटे का घेराव। राहुल गांधी ने कहा, “देश के साथ जो हुआ है वो देशद्रोह है। चाहे पीएम मोदी हों, अमित शाह हों या ज्ञानेश कुमार, किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।” शाम करीब 8 बजे पुलिस ने आकाशवाणी परिसर खाली कराया। राहुल गांधी को घसीटकर बस में बैठाया गया। नेताओं को किंग्सवे कैंप पुलिस स्टेशन ले जाया गया और रात 10 बजे रिहा कर दिया गया।
नया राजनीतिक हथियार
विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी अब सिर्फ सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने के बजाय सड़क पर अचानक उपस्थिति दर्ज कराकर मुद्दों को राष्ट्रीय ध्यान में ला रहे हैं। ये फ्लैश प्रोटेस्ट उनकी नई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गए हैं, जिसमें वे पुलिस की तैयारी को चकमा देकर मीडिया और जनता का ध्यान खींचते हैं। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक SIR को ‘वोट चोरी’ बताकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

