पीएम मोदी ने 33 साल पहले दिवंगत स्वामी चिन्मयानंद के AI होलोग्राम से की बात, आलोचना और समर्थन का दौर शुरू

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान 33 साल पहले दिवंगत स्वामी चिन्मयानंद के AI आधारित होलोग्राफिक अवतार (होलोबॉट) से बातचीत की। इस अनोखे संवाद में मोदी ने 1993 की मुलाकात याद की और आशीर्वाद मांगा, जबकि होलोबॉट ने उन्हें “भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र” कहकर आशीर्वाद दिया। यह घटना आस्था और आधुनिक तकनीक के मिलन के रूप में प्रस्तुत की गई, लेकिन सोशल मीडिया और विपक्षी खेमे में इसकी तीखी आलोचना भी हुई। द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने एक्स पर लिखा कि मुख्यधारा का मीडिया जब इस “अजीब और फर्जी बातचीत” को “मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से बातचीत की” कहकर रिपोर्ट करता है तो वह जानबूझकर आंख मूंदकर यकीन करने का उदाहरण पेश करता है। उन्होंने इसे नोटबंदी के दौर की माइक्रोचिप वाली काल्पनिक कहानी से भी बदतर बताया।

बातचीत में क्या हुआ?
पीएम मोदी ने होलोबॉट से कहा, “1993 में… हरि ओम नरेंद्र, बिल्कुल याद है। तुम फरवरी 1993 में बड़ौदा आए थे। मेरा यह सौभाग्य था कि मुझे आपके दर्शन करने का अवसर मिला।” उन्होंने आशीर्वाद मांगा कि वे जो कार्य करना चाहते हैं, उसमें मदद मिले। होलोबॉट ने 1993 की वडोदरा मुलाकात याद की, जब मोदी ने उन्हें शिकागो में विश्व धर्म संसद की शताब्दी समारोह में आमंत्रित किया था। स्वामी जी ने तब उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए युवाओं को जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। होलोबॉट ने आगे कहा कि आज भारत को देखकर खुशी होती है और मोदी मंदिरों के पुनरुद्धार, शिक्षा व अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। अंत में “शिखर का व्यक्ति अकेला होता है” कहकर श्रीखंड प्रसाद खाने की सलाह दी और “भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र” कहा। संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे आस्था और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का मिलन बताया। चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष के उत्सव के हिस्से के रूप में यह होलोबॉट मिशन के अभिलेखागार पर आधारित था।

आलोचना और मीम्स
कांग्रेस सेवा दल के चीफ ऑर्गेनाइजर लालजी देसाई (या श्रीनिवास बीवी) ने लिखा कि दुनिया AI का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा और विज्ञान में कर रही है, वहीं मोदी जी 1993 में दिवंगत बाबा जी से अपनी तारीफ करवाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने स्वामी जी का पुराना वीडियो भी शेयर किया जिसमें वे कहते हैं, “अच्छे लोगों को धर्म की जरूरत नहीं होती… धर्म की जरूरत केवल बदमाशों को होती है।” सोशल मीडिया पर “AI बाबा”, “Hari Om Narendra” जैसे मीम्स वायरल हुए। अभिनेता प्रकाश राज और यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी आलोचना की। कई लोगों ने इसे राजनीतिक PR, दिवंगत संत का अपमान या वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया।

स्वामी चिन्मयानंद कौन थे?
स्वामी चिन्मयानंद का जन्म 8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम में बालकृष्ण मेनन के रूप में हुआ था। अंग्रेजी साहित्य की डिग्री के बाद पत्रकार बने, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। जेल और बीमारी के बाद जीवन दृष्टि बदली। 1942 के आसपास ऋषिकेश में स्वामी शिवानंद से मुलाकात हुई। 25 फरवरी 1949 को दीक्षा मिली। दिसंबर 1951 में पुणे में पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया और 8 अगस्त 1953 को चिन्मय मिशन की औपचारिक स्थापना हुई। वे अंतरधार्मिक संवाद के समर्थक थे। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उनकी जन्म शताब्दी पर हृदय की पवित्रता और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद पर जोर दिया था। स्वामी जी का निधन 3 अगस्त 1993 को अमेरिका के सैन डिएगो में हुआ।होलोग्राम तकनीक मृत व्यक्ति से सीधी बात नहीं कराती। यह आवाज, शैली और अभिलेखागार पर आधारित डिजिटल सिमुलेशन है। इस घटना ने AI के नैतिक उपयोग, सहमति और दिवंगत व्यक्तियों की छवि के इस्तेमाल पर बहस छेड़ दी है। समर्थक इसे आध्यात्मिक विरासत को जीवंत रखने का तरीका मानते हैं, जबकि आलोचक इसे मंचित और राजनीतिक बता रहे हैं।

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