उत्तर प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा डायल-112, जो आम नागरिकों के लिए संकट की घड़ी में मददगार बनने के लिए बनाई गई थी, आज उसी सेवा से जुड़ा एक शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर तूफान बनकर छा गया है। नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डी पार्क के पास डायल-112 पीसीआर पर तैनात एक पुलिसकर्मी पर एक ऑटो चालक से 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है और इस पूरी कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
सेक्टर 62 डी पार्क के आसपास बड़ी संख्या में ऑटो और ई-रिक्शा चालक सवारी के इंतजार में खड़े रहते हैं। आरोप है कि इसी दौरान डायल-112 पीसीआर पर तैनात पुलिसकर्मी वहां पहुंचा और ऑटो चालकों से पैसे वसूले। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी गाड़ी के अंदर बैठकर ऑटो चालक से बातचीत करता नजर आ रहा है। वीडियो में स्पष्ट सुनाई दे रहा है — “जल्दी सेवा, पानी कर चल… समझा करो साहब, स्टाफ का मामला है।” यह संवाद वायरल होते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया और देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर जनता का फूटा गुस्सा
वीडियो के वायरल होते ही ट्विटर (अब X), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। लोगों का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर वही सड़क पर वाहन चालकों से पैसे लेते नजर आएं तो इससे पूरी व्यवस्था की छवि धूमिल होती है।
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों की प्रमुख प्रतिक्रियाएं इस प्रकार रहीं:
एक यूज़र ने लिखा: “जिसे हम मुसीबत में बुलाते हैं, वही हमसे ‘सेवा-पानी’ मांग रहा है। यह भ्रष्टाचार की सबसे घिनौनी शक्ल है।”दूसरे यूज़र का कहना था: “सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा देती है और 112 वाले सड़क पर बेखौफ वसूली करते हैं — यह सिस्टम का असली चेहरा है।”एक महिला यूज़र ने लिखा: “ऑटो चालक पहले से इतनी मंहगाई में पिस रहा है, ऊपर से पुलिस भी उससे वसूली करे — यह तो बेहद अन्यायपूर्ण है।” एक अन्य ने व्यंग्य करते हुए कहा: “डायल-112 बदल गया… अब यह ‘मांगो-5000’ सेवा बन गई है।”सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस व्यवस्था और सड़क पर तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर व्यापक नाराजगी जाहिर की।
पुलिस विभाग का रुख और जांच
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लिया गया है और जांच कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक यदि जांच में पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध उगाही के लिए कोई जगह नहीं है जनता के साथ गलत व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रेस वार्ता नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार वीडियो फुटेज की तकनीकी जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है।
यह पहला मामला नहीं
यह घटना अकेली नहीं है। नोएडा में पहले भी पुलिसकर्मियों पर वाहन चालकों से अवैध वसूली के आरोप लग चुके हैं। कई मामलों में वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय जांच बैठाई गई और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई। हालांकि पुलिस विभाग समय-समय पर भ्रष्टाचार रोकने और कर्मियों को अनुशासन में रखने के निर्देश जारी करता है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है। मार्च 2026 में मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भी इसी प्रकार का मामला सामने आया था, जब डायल-112 वाहन के चालक द्वारा कथित रूप से रिश्वत मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस मामले में भी पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर पर अनुशासन को लेकर कई सवाल उठे थे।
डायल-112 का मूल उद्देश्य और जनता का टूटता भरोसा
डायल-112 सेवा आम जनता को तुरंत सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी। सड़क हादसा हो, झगड़ा हो या किसी भी प्रकार की आपात स्थिति हो लोग सबसे पहले डायल-112 पर ही मदद मांगते हैं। ऐसे में यदि इसी सेवा से जुड़े पुलिसकर्मी उगाही में लिप्त पाए जाते हैं, तो इससे जनता का भरोसा कमजोर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं जनता और पुलिस के बीच भरोसे की दूरी बढ़ा सकती हैं। यह मामला केवल एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन गया है।
निष्कर्ष और जनता की मांग
फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर शेयर हो रहा है और लोग इस पूरे मामले में पारदर्शी जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जनता का सवाल सीधा है जब डायल-112 खुद ही “उगाही सेवा” बन जाए, तो संकट में आम आदमी किसे पुकारे? पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अब न केवल इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डायल-112 जैसी जनसेवा का दुरुपयोग भविष्य में न हो वरना सरकार के “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” के दावे खोखले साबित होंगे।
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