दिल्ली से गुरुग्राम तक होटल-ढाबों में हो रही थी सप्लाई, पशुओं के बीच बनता था अचार, केमिकल से साफ कर दोबारा बाज़ार में उतारते थे कारोबारी; 30 नमूने जांच को भेजे, लैब रिपोर्ट के बाद होगी एफआईआर।
अगर आप बाहर खाना खाने के शौकीन हैं, होटल-ढाबों पर परोसे जाने वाले अचार को चाव से खाते हैं, या साप्ताहिक बाज़ार से खुला अचार खरीदकर घर लाते हैं तो यह खबर आपकी थाली के बारे में है। और यह खबर आपको परेशान करने वाली है। गाज़ियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को एक के बाद एक दो गोदामों और अवैध फैक्ट्रियों पर छापा मारा। वहाँ जो मिला, वह किसी की भी रूह कँपा देने वाला था। ड्रमों में भरा सड़ा-गला आम और नींबू का अचार, जिसमें इतनी तेज दुर्गंध थी कि अधिकारियों का वहाँ खड़ा रह पाना भी मुश्किल हो रहा था। छापेमारी के दौरान एक फैक्ट्री एक तबेले में संचालित पाई गई, जहाँ पशुओं के बीच बेहद गंदे और अस्वच्छ माहौल में अचार तैयार एवं संग्रहीत किया जा रहा था। और इसी ज़हरीले अचार को केमिकल से साफ कर, नए मसाले मिलाकर, ताज़े अचार के रूप में दिल्ली-एनसीआर के होटलों, ढाबों और साप्ताहिक बाज़ारों में बेचा जा रहा था।
छापे की पूरी कहानी : दो ठिकाने, दो गोदाम, एक ही गंदा कारोबार
गाज़ियाबाद जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग ने खोड़ा क्षेत्र के आदर्श नगर में बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से संचालित दो अचार फैक्ट्रियों पर छापा मारा। जांच के दौरान दोनों फैक्ट्रियों में भारी गंदगी और खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया। पहला ठिकाना था खोड़ा के शनि बाज़ार में पवन सिंह का गोदाम। यहाँ 20 ड्रमों में भरा आम और नींबू का अचार सड़ी-गली अवस्था में मिला। करीब 1000 किलोग्राम अचार मौके पर ही नष्ट कराया गया। दूसरा ठिकाना था मास्टर्स पार्क के पास स्थित ‘राहुल अचार वाले’ का गोदाम, जहाँ 2400 किलोग्राम अचार नष्ट कराया गया। इस कार्रवाई में यह भी सामने आया कि एक फैक्ट्री कथित रूप से दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड दारोगा के तबेले में संचालित हो रही थी, जहाँ बिना किसी स्वच्छता मानक के खाद्य सामग्री तैयार की जा रही थी। अधिकारियों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानते हुए 34 क्विंटल तैयार अचार को नष्ट करवा दिया। इसके अलावा 180 किलोग्राम तैयार अचार और 9 क्विंटल नमक को भी सीज किया गया।
केमिकल से “ताज़ा” बनाने का खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह कारोबार महज एक गोदाम तक सीमित नहीं था — यह एक सुनियोजित आपराधिक व्यवसाय था। विभिन्न स्थानों से खराब हो चुका या एक्सपायर हो चुका अचार बेहद सस्ते दाम पर खरीदा जाता था। उसे यहाँ लाकर केमिकल की मदद से साफ किया जाता था, फिर उसमें ताज़े मसाले मिलाकर उसे नए अचार की तरह दोबारा तैयार कर लिया जाता था। इसके बाद यही “रिसाइकिल्ड” अचार दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के होटलों-ढाबों तथा साप्ताहिक बाज़ारों में सप्लाई कर दिया जाता था।फूड सेफ्टी अधिकारी आशुतोष राय ने बताया कि पूरी इकाई में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था और गंभीर लापरवाही पाई गई है। उन्होंने बताया कि मौके से 30 नमूने — जिनमें नींबू, मिक्स अचार और सिरके के नमूने शामिल हैं — लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद दोनों संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फफूंद का ज़हर : लिवर और किडनी तक को नुकसान
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम के अनुसार, फफूंद लगे अचार का सेवन शरीर के लिए अत्यंत घातक हो सकता है। इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएँ तो होती ही हैं, लेकिन खतरा यहीं नहीं रुकता। कुछ प्रकार की फफूंद माइकोटॉक्सिन जैसे विषैले तत्व उत्पन्न करती है जो सीधे लिवर और किडनी को नुकसान पहुँचाते हैं। लंबे समय तक इस तरह का दूषित अचार खाते रहने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम भी कमज़ोर पड़ जाती है।
अब भी सावधानी ज़रूरी : विशेषज्ञों की सलाह
अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि केवल एफएसएसएआई प्रमाणित और ब्रांडेड उत्पाद ही उपयोग करें, क्योंकि अस्वच्छ परिस्थितियों में बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं, जिनसे फूड पॉइजनिंग, पेट की बीमारियाँ और लीवर तक को नुकसान हो सकता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने स्पष्ट किया कि इस तरह की छापेमारी की मुहिम आगे भी जारी रहेगी और लैब रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ एफएसएसएआई की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सिर्फ एक गोदाम पर छापे की खबर नहीं है यह उस बड़े तंत्र की एक झलक है जो शायद आपकी थाली में रोज़ परोसा जा रहा हो। सवाल यह है कि जब तक विभाग का छापा न पड़े, तब तक इसकी जानकारी किसे होती है?

