पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी, दो हफ्तों में 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हुए ईंधन

राज्य-owned तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। यह मई महीने में चौथी बार हुई बढ़ोतरी है, जिसके बाद दो हफ्तों में कुल मिलाकर पेट्रोल और डीजल दोनों करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 2.71 रुपये महंगा होकर 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी हुई है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में पेट्रोल अब 108 से 115 रुपये प्रति लीटर के बीच पहुंच गया है।

बढ़ोतरी का सिलसिला
15 मई: पहली बढ़ोतरी, करीब 3 रुपये प्रति लीटर।
19 मई: दूसरी बढ़ोतरी, लगभग 90 पैसे।
23 मई: तीसरी बढ़ोतरी, औसतन 90 पैसे।
25 मई: चौथी बढ़ोतरी, पेट्रोल में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये।

यह बढ़ोतरी वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण हुई है। ईरान-इजराइल संघर्ष और हORMuz की खाड़ी में आपूर्ति बाधाओं के चलते ब्रेंट क्रूड 98-100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो फरवरी के अंत से 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है। भारत अपनी 85 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाएं सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।

अर्थव्यवस्था पर असर
विश्लेषकों ने चेतावाया है कि लगातार ईंधन महंगा होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी, जो अंततः जरूरी वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित करेगी। परिवहन क्षेत्र में ईंधन की लागत सीधे ट्रक, बस, टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं को प्रभावित करती है।
मुद्रास्फीति का खतरा: विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन बढ़ोतरी से CPI मुद्रास्फीति पर 15-25 आधार अंकों (0.15-0.25%) का सीधा प्रभाव पड़ सकता है, जबकि अप्रत्यक्ष प्रभाव इससे कहीं अधिक होगा। खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला महंगी होने से आम उपभोक्ता पर बोझ बढ़ेगा।

उद्योगों पर बोझ: विनिर्माण, कृषि और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है।
उपभोक्ता प्रतिक्रिया: दिल्ली समेत कई शहरों में आम लोग और टैक्सी चालकों ने निराशा जताई है। एक टैक्सी ड्राइवर ने कहा, “हर हफ्ते कीमत बढ़ रही है, कमाई तो वही है, खर्च बढ़ रहा है।” सरकार और तेल कंपनियां कह रही हैं कि तेल कंपनियां लंबे समय से भारी नुकसान उठा रही थीं, इसलिए कीमतों में समायोजन जरूरी हो गया था। हालांकि विपक्षी दलों ने केंद्र पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाया है।

विशेषज्ञों की राय: अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर वैश्विक तेल कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आगे भी बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि ईंधन की बचत के उपाय अपनाएं, जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल और अनावश्यक यात्राओं में कटौती। यह लगातार बढ़ोतरी आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा रही है, खासकर महानगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां परिवहन पर निर्भरता अधिक है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि स्थिति पर नजर रखते हुए राहत के उपाय किए जाएं।

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