‘गोली चलाओ, जो होगा मैं देख लूंगा’ गार्ड के बयान से खुली खान सर की मुसीबत; ज्ञान बिंदु डायरेक्टर समेत 5 गिरफ्तार, छात्र सड़कों पर
बिहार की राजधानी पटना में दो प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थानों के बीच चल रहा वर्चस्व का टकराव अब एक गंभीर कानूनी और सामाजिक संकट में तब्दील हो चुका है। 2 जून 2026 की रात करीब 10 बजकर 10 मिनट पर पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र में स्थित ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (KGS) कोचिंग संस्थान परिसर में पथराव और तोड़फोड़ की घटना हुई, जिसने पूरे पटना की शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया।
रात का हमला — पत्थर, तोड़फोड़ और फायरिंग
पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ के बाहर प्रतिद्वंद्वी ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान’ के कुछ लोगों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। हमले के दौरान कोचिंग के सुरक्षा गार्डों ने अपनी राइफलों से कई राउंड फायरिंग की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू की। घटना के दौरान संस्थान का एक सुरक्षा गार्ड घायल भी हो गया। वायरल वीडियो में कुछ लोगों को कोचिंग संस्थान के बाहर ईंट-पत्थर फेंकते और पोस्टर फाड़ते देखा गया। घटना की खबर फैलते ही सैकड़ों छात्र खान सर के समर्थन में सड़कों पर उतर आए।
ज्ञान बिंदु डायरेक्टर रौशन आनंद गिरफ्तार
खान सर उर्फ फैजल खान ने ‘ज्ञान बिंदु कोचिंग’ के संचालक रौशन आनंद पर इस हमले और तोड़फोड़ का आरोप लगाया। सीसीटीवी फुटेज की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पटना पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के डायरेक्टर रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने रौशन आनंद, अभिषेक कुमार और गौरव कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में कुल गिरफ्तारियों की संख्या पाँच तक पहुँच गई।
पलटी बाजी — खान सर पर भी FIR
मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई। वायरल वीडियो में खान सर के दो निजी सुरक्षा गार्ड कोचिंग परिसर के बाहर सरेआम फायरिंग करते हुए साफ नजर आए, जिसके बाद पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों बॉडीगार्ड्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने गार्डों के बयान के आधार पर ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर के खिलाफ कदमकुआं थाने में मामला दर्ज किया। पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने पुष्टि की कि खान ग्लोबल स्टडीज में हुई तोड़फोड़ और संबंधित घटनाओं के मामले में दर्ज FIR में खान सर का नाम भी शामिल किया गया है। कदमकुआं थाने में दर्ज इस FIR में फैजल खान पर हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, झूठी सूचना देने और साक्ष्यों को छिपाने जैसी कई गंभीर और गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं।
‘गोली चलाओ’ — गार्ड का वह बयान जिसने पलट दिया पूरा मामला
इस पूरे विवाद का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह बयान है जो खान सर के अपने सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को दिया। पुलिस ने जब्त दोनों राइफलों को फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार गार्डों ने पुलिस को बताया कि खान सर ने खुद उन्हें गोली चलाने का आदेश देते हुए कहा था — “गोली चलाओ, जो होगा मैं देख लूंगा।” गार्ड्स द्वारा दिया गया यह बयान कानूनी रूप से खान सर के खिलाफ केस को बेहद मजबूत करता है, इसी उकसावे और साजिश के आधार पर पटना पुलिस ने खान सर को मुख्य आरोपी बनाते हुए नामजद FIR दर्ज की।
खान सर का सरेंडर और वकील का पलटवार
खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर शनिवार (6 जून) को अपने वकील के साथ पटना सिविल कोर्ट पहुंचे और अदालत में आत्मसमर्पण किया। उनके खिलाफ फायरिंग और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले में FIR दर्ज की गई थी। खान सर के वकील अरविंद कुमार मव्वर ने इस पूरी कार्रवाई को ‘बदले की भावना से उठाया गया कदम’ करार दिया। वकील का दावा है कि खान सर के स्टाफ ने 2 जून को संबंधित डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, और इसी के प्रतिशोध में खान सर को फंसाया जा रहा है।
दूसरे पक्ष की चेतावनी
ज्ञान बिंदु एकेडमी की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया जिसमें खान सर के गार्ड हवा में फायरिंग करते दिखे। ज्ञान बिंदु के शिक्षक वरुण ठाकुर ने प्रशासन पर सुस्ती का आरोप लगाते हुए कहा कि रौशन आनंद को तुरंत पकड़ा गया, लेकिन खान सर की गिरफ्तारी में देरी की गई। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई न होने पर दोबारा सड़कों पर उतरने की चेतावनी भी दी।
पटना SSP और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
FIR के 24 घंटे बाद भी खान सर की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पुलिस पर सवाल उठ रहे थे। यह भी सवाल उठे कि FIR के बाद खान सर कहाँ गायब हो गए। विपक्ष और सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।
विश्लेषण: कोचिंग का ‘अखाड़ा’ या शिक्षा का संकट?
पटना का यह मामला केवल दो संस्थानों की आपसी प्रतिद्वंद्विता नहीं है यह उस व्यावसायिक स्पर्धा का खुला रूप है जो देश के कोचिंग उद्योग में पनप रही है। जहाँ छात्र सपनों के साथ दाखिला लेते हैं, वहाँ बंदूकें तानी जाने की यह घटना समाज के लिए एक खतरनाक संकेत है। प्रशासन की परीक्षा यह है कि वह दोनों पक्षों के साथ कानून की नजर में एक जैसा बर्ताव करे। फिलहाल अदालत में जमानत याचिका पर फैसला होना बाकी है। FSL रिपोर्ट के आने के बाद मामले में और नए खुलासे होने की संभावना है।
यह भी पढ़ें: जज ने ट्रंप को लगाई फटकार, 1 लाख डॉलर H-1B वीजा फीस गैर-कानूनी करार

