लखनऊ। साधन सहकारी समितियों (PACS) के हज़ारों कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ईको गार्डन में जोरदार प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन न मिलने और कमीशन आधारित व्यवस्था के कारण उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। यदि सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो प्रदेश भर के पैक्स कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे।
कमीशन आधारित वेतन व्यवस्था से आर्थिक बदहाली
साधन सहकारी समिति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह चौहान ने बताया कि पैक्स कर्मचारी लंबे समय से वेतन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
- कमीशन व्यवस्था से मुश्किल: कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला वेतन पूरी तरह कमीशन पर आधारित है, जिससे उनके घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
- वर्षों का बकाया: कई कर्मचारियों को पिछले 2 से 4 साल तक का वेतन नहीं मिला है।
- प्रमुख मांग: कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि उनके वेतन भुगतान की व्यवस्था सीधे सरकारी कोष से की जाए, बकाया वेतन दिलाया जाए और वेतन निर्धारण की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव किया जाए।
बैठकों और ज्ञापनों का नहीं निकला नतीजा
कर्मचारी संघ के अनुसार, उन्होंने शासन और अधिकारियों के समक्ष बार-बार अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकला:
- 7 सितंबर: कर्मचारियों ने आयुक्त एवं निबंधक को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
- 21 सितंबर: अधिकारियों के साथ बैठक हुई, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
- 22 सितंबर: विरोध स्वरूप कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया।
- 7 अक्टूबर: मांगें पूरी न होने पर आयुक्त कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी गई, जिसके बाद 5 अक्टूबर को पुनः वार्ता बुलाई गई, पर बात नहीं बनी।
सहकारिता मंत्री से बातचीत भी रही बेनतीजा
कर्मचारी नेताओं ने सहकारिता मंत्री से भी मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं। वार्ता के दौरान वेतन भुगतान की व्यवस्था बनाने का आश्वासन तो मिला था, लेकिन अब तक इसके संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
लगातार बैठकों और ज्ञापनों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी रहने के कारण कर्मचारियों को मजबूरन 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
1 करोड़ 9 लाख किसानों से सीधे जुड़ाव और सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश भर के कर्मचारी एक साथ सामूहिक इस्तीफा देंगे।
किसानों पर असर: पैक्स कर्मचारियों का दावा है कि प्रदेश के लगभग 1 करोड़ 9 लाख किसान सीधे उनसे जुड़े हुए हैं। इन समितियों के माध्यम से ही किसानों को खाद, बीज उपलब्ध कराए जाते हैं तथा धान एवं गेहूं की सरकारी खरीद का कार्य निष्पादित किया जाता है। हड़ताल के कारण किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और खरीद प्रक्रिया पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

