ऑनलाइन गेम बना ठगी का अड्डा: डिजिटल युग में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं। ताजा मामले में नोएडा के सेक्टर-39 क्षेत्र की एक आवासीय सोसाइटी में रहने वाली महिला को ऑनलाइन गेम के जरिए जाल में फंसाकर 10 लाख रुपये ठग लिए गए। मामला यहीं नहीं रुका पैसे वापस होने के बाद आरोपी ने बदले की भावना से महिला और उसके परिवार की आपत्तिजनक और मॉर्फ्ड तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करनी शुरू कर दीं। साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जांच में जुटी है।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
साइबर जालसाज ने महिला से ऑनलाइन गेम के माध्यम से दोस्ती की और ब्लैकमेल कर 10 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़िता के अनुसार, उसकी बड़ी बहन का 2023 में विकास कुमार नामक युवक से ऑनलाइन गेम के जरिए परिचय हुआ था। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी और विकास ने निजी जानकारी जुटाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोपी ने परिवार की समूची व्यक्तिगत जानकारी घर का पता, परिवार के सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर इकट्ठी कर ली और पहले 20 लाख रुपये की मांग की। जब इतनी रकम नहीं मिली तो दिसंबर 2024 में महिला के बैंक खाते से 10 लाख रुपये जबरन ट्रांसफर करा लिए।
पुलिस और कोर्ट की मदद से मिले 8.45 लाख, फिर शुरू हुई धमकियाँ
मामले की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई थी। बाद में पुलिस और कोर्ट की मदद से पीड़िता को करीब 8.45 लाख रुपये वापस मिले। लेकिन पैसे वापस होते ही आरोपी ने मानो प्रतिशोध की नई राह चुन ली। आरोपी अब महिला की मॉर्फ्ड फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहा है। झूठे इंस्टाग्राम अकाउंट बनाकर अनुचित तस्वीरें और संदेश साझा किए गए। पीड़िता की बहन का मोबाइल नंबर भी सोशल मीडिया पर डाल दिया गया, जिससे अनजान लोगों के फोन आने लगे।
परिवार को जान से मारने की धमकी
पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने उसके पति, बेटी और अन्य परिजनों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी है। परिवार दहशत में जी रहा है। महिला ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
देशभर में साइबर ठगी का विस्फोट, UP सबसे प्रभावित राज्यों में
यह मामला किसी अकेली घटना का नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकट का हिस्सा है। 2025 में भारतीयों ने साइबर धोखाधड़ी में करीब 22,495 करोड़ रुपये गंवाए और कुल 28.15 लाख मामले सामने आए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 22.68 लाख था। बीते चार सालों में ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और साइबर अटैक जैसे मामलों में 401 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में 1,400 करोड़ रुपये की साइबर ठगी दर्ज हुई और यह देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है। अब भारत में 459 समर्पित साइबर अपराध पुलिस स्टेशन हैं, जो 2020 में केवल 169 थे। उत्तर प्रदेश 75 साइबर अपराध पुलिस स्टेशनों के साथ सबसे आगे है।
ऑनलाइन गेमिंग — साइबर ठगों का नया मैदान
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर ठग सोशल मीडिया और गेमिंग के शौक को हथियार बनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।  अनुमान के मुताबिक, देश के 45 करोड़ लोगों ने रियल मनी गेमिंग में अब तक लगभग 20 हजार करोड़ रुपये गंवाए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि चाहे ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीम हो या गेमिंग के जरिए पैसा कमाने का लालच यही लालच लोगों को जाल में फंसाता है और वे लाखों रुपये गंवा देते हैं।
क्या करें, क्या न करें — पुलिस की सलाह
साइबर विशेषज्ञ और पुलिस की ओर से नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है: ऑनलाइन गेम या सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। किसी के दबाव में आकर बैंक ट्रांसफर न करें।ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तुरंत 1930 (नेशनल साइबर हेल्पलाइन) या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। मॉर्फ्ड फोटो या झूठी पोस्ट के मामले में साइबर थाने से संपर्क करें।नोएडा का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि डिजिटल दुनिया में दोस्ती की आड़ में बिछाए गए जाल से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। जाँच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी विकास कुमार जल्द ही कानून की गिरफ्त में होगा।

