NSUI students climbed a water tank in Jaipur: जयपुर में छात्रसंघ चुनाव और अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े तीन NSUI नेता, पुलिस-प्रशासन ने संभाला मोर्चा

NSUI students climbed a water tank in Jaipur: जयपुर में छात्रसंघ चुनाव बहाली और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI के तीन छात्र नेता गुरुवार सुबह पानी की टंकी पर चढ़ गए। प्रदर्शनकारियों में विजयपाल कुड़ी, वियोना जाट और कोशिन खान शामिल बताए गए हैं, जिन्होंने गांधी नगर रेलवे स्टेशन परिसर की टंकी पर चढ़कर अपना विरोध दर्ज कराया। छात्र नेताओं का कहना है कि राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों पर लगी रोक लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, जबकि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के लिए वे केंद्र सरकार और गृह मंत्री को जिम्मेदार मानते हैं। उनके मुताबिक जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, वे नीचे नहीं उतरेंगे। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों को समझाने की कोशिश शुरू की गई। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की बहाली को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है और छात्र संगठन इस मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं। ताजा प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य की छात्र राजनीति और सरकार की नीति पर बहस तेज कर दी है।

पृष्ठभूमि

राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से विवाद का विषय बने हुए हैं। NSUI और अन्य छात्र संगठन बार-बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव रोककर छात्रों के नेतृत्व चुनने के अधिकार को छीना जा रहा है। दूसरी तरफ, जंतर-मंतर पर हुए विरोध और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी छात्र संगठनों में नाराजगी गहरी है। इसी नाराजगी ने जयपुर के इस ताजा प्रदर्शन को और तीखा बना दिया है। यह घटना सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि राजस्थान में छात्र राजनीति के बढ़ते तनाव का संकेत भी है। पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध दर्ज कराना यह दिखाता है कि छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर अब अधिक आक्रामक और प्रतीकात्मक तरीके अपना रहे हैं।सरकार और प्रशासन के लिए अब चुनौती सिर्फ टंकी से छात्रों को सुरक्षित नीचे उतारने की नहीं, बल्कि छात्रसंघ चुनाव जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर भरोसेमंद संवाद बनाने की भी है।

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