अलाइनमेंट को मंजूरी, अब IIT रुड़की तैयार करेगा फिजिबिलिटी रिपोर्ट और DPR, सेक्टर-12/22 टी-प्वाइंट पर होगा सबसे जटिल काम
नोएडा न्यूज़: नोएडा प्राधिकरण ने रजनीगंधा अंडरपास के सामने से प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के संशोधित अलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है। अलाइनमेंट फाइनल न होने की वजह से यह महत्वाकांक्षी परियोजना काफी समय से अटकी हुई थी। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्ण करुणेश के सामने आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार फिजिबिलिटी रिपोर्ट का प्रजेंटेशन दिया गया, जिसके बाद सोमवार को नए रूट पर मुहर लगा दी गई। अब जल्द ही इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य जमीन पर उतर सकेगा।
कहां से कहां तक बनेगी सड़क
यह 6 लेन का एलिवेटेड मार्ग करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा। यह सेक्टर-3 स्थित रजनीगंधा अंडरपास से शुरू होकर सेक्टर-10, सेक्टर-12, सेक्टर-22 टी-प्वाइंट और सेक्टर-57 होते हुए सेक्टर-60 स्थित यूप्लेक्स तक पहुंचेगा। इसे आगे एमपी-2 रोड से भी जोड़ने की योजना है। परियोजना पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सबसे जटिल हिस्सा, सेक्टर-12/22 टी-प्वाइंट
परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सेक्टर-12 और सेक्टर-22 का टी-प्वाइंट माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक अगर यहां मार्ग सीधे मोड़ा जाए तो करीब 90 डिग्री का तीखा मोड़ बन सकता है, जिससे यातायात प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से आईआईटी रुड़की इस हिस्से के लिए विशेष कर्व डिजाइन तैयार करेगा।
अभी कितना लगता है जाम, कितना घटेगा समय
फिलहाल औद्योगिक सेक्टर फेज-1 और फेज-3 के बीच सफर करने वालों को रजनीगंधा, सेक्टर-10/21 चौराहा, चौड़ा मोड़, सेक्टर-12 तिराहा और सेक्टर-57 तक कुल पांच रेड लाइटों से गुजरना पड़ता है। पीक आवर में यहां भारी जाम लगता है और यह सफर करीब 30 मिनट में पूरा होता है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद वाहन चालक बिना रुके यही दूरी महज 10 मिनट में तय कर सकेंगे।
किसे मिलेगा फायदा
इस सड़क से नोएडा के स्थानीय निवासियों के अलावा दिल्ली (डीएनडी के रास्ते), गाजियाबाद, खोड़ा और इंदिरापुरम आने-जाने वाले लाखों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही नोएडा के औद्योगिक और आईटी हब तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को रोजाना की जाम की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
पुराना इतिहास
गौरतलब है कि इस सड़क की योजना 2017 से पहले भी बनाई गई थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम का शिलान्यास पत्थर भी लगाया गया था, लेकिन परियोजना उस समय अमल में नहीं लाई जा सकी थी और वह पत्थर आज भी वहीं मौजूद है। 2021 में प्राधिकरण ने इस मार्ग को सिग्नल-फ्री बनाने के लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) से भी रिपोर्ट तैयार करवाई थी, जिसके बाद कुछ सुधार तो हुए लेकिन ट्रैफिक दबाव पूरी तरह कम नहीं हो सका था। अब अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद यह परियोजना एक बार फिर रफ्तार पकड़ती दिख रही है।

