जेवर (गौतमबुद्ध नगर)। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) में काम करने वाले ठेकेदार के मजदूरों ने मंगलवार (22 सितंबर) शाम करीब 5 बजे प्रदर्शन कर टाटा कंपनी के खिलाफ नाराजगी जताई। मजदूरों का आरोप है कि पिछले छह महीने से उनका वेतन नहीं मिला है। वे एयरपोर्ट निर्माण और संबंधित कार्यों में लगे हैं और ठेकेदार के माध्यम से टाटा कंपनी के लिए काम करते हैं।
मजदूरों ने टाटा कंपनी के अधिकारियों से मुलाकात कर जल्द भुगतान की मांग की। उनका कहना है कि एयरपोर्ट का काम शुरू होने से पहले से वे यहां लगे हुए हैं। शुरुआत में वेतन समय पर मिलता था, लेकिन पिछले छह महीनों से भुगतान पूरी तरह रुक गया है। कई मजदूर दूसरे जिलों और राज्यों से आए हैं। वे किराए के मकानों में रह रहे हैं और परिवार का खर्च भी खुद ही उठाना पड़ता है। 12-12 घंटे की ड्यूटी करने के बावजूद कई महीने से वेतन न मिलने से किराया, घर का खर्च और परिवार को पैसे भेजने में भारी परेशानी हो रही है।
ठेकेदार का पक्ष: टाटा पर 14 करोड़ बकाया
ठेकेदार के प्रतिनिधियों ने बताया कि टाटा कंपनी पर करीब 14 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। भुगतान न होने के कारण मजदूरों का वेतन नहीं दिया जा सका। वे लगातार कंपनी के अधिकारियों से भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला। टाटा कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह विवाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ा है, जहां टाटा प्रोजेक्ट्स मुख्य निर्माण एजेंसी के रूप में काम कर रही है। एयरपोर्ट पर पहले भी भुगतान संबंधी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अगस्त 2026 में एक कैंटीन संचालक ने टाटा प्रोजेक्ट्स पर करीब 40-45 लाख रुपये बकाया न देने और कैंटीन खाली कराने का दबाव बनाने का आरोप लगाया था।
मजदूरों की दिक्कतें और मांग
मजदूरों का कहना है कि लंबे काम के घंटे और बकाया वेतन ने उनकी आर्थिक स्थिति खराब कर दी है। वे जल्द भुगतान और नियमित वेतन व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और मजदूर अधिकारियों से बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यह घटना उन मजदूरों की स्थिति को रेखांकित करती है जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में ठेकेदारों के माध्यम से काम करते हैं। एयरपोर्ट परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के वादे भी पहले से चर्चा में रहे हैं, लेकिन ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले मजदूरों को समय पर भुगतान न मिलना एक अलग चुनौती बन गया है। प्रशासन और कंपनी दोनों से इस मामले में जल्द स्पष्टता और समाधान की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल मजदूर अपने बकाया वेतन की मांग पर अड़े हुए हैं।
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