नोएडा। औद्योगिक शहर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में बीते कुछ दिनों से जारी तनाव ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। हिसा के रूप में बदला ये तनाव कुछ कह रहा है। दरअसल, इस पूरे बवाल के पीछ मंहगाई भी जिम्मेदार है। खासतौर से ब्लेक में मिलने वाली एलपीजी जिसने गरीब कामगारों की कमर तोड़ दी है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हंगामे और उसके बाद पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई के डर से भारी संख्या में श्रमिक अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। इस पलायन का असर सीधे तौर पर उत्पादन पर पड़ता दिख रहा हैए जिससे औद्योगिक इकाइयों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
महंगाई ने तोड़ी कमर: 600 रुपये में 1 किलो गैस
कामगारों के सामने सबसे बड़ी समस्या जीवन.यापन की बढ़ती लागत है। एलपीजी कनेक्शन न होने के कारण कई श्रमिक छोटे सिलिंडरों का सहारा ले रहे हैं। हालात यह हैं कि कामगार 600 रुपये देकर महज एक किलो गैस भरवाने को मजबूर हैं। 4 से 6 सदस्यों वाले परिवार में यह एक किलो गैस चार दिन भी नहीं टिक पा रही है। इतनी महंगी दर पर ईंधन खरीदना कम आय वाले श्रमिकों के लिए असंभव होता जा रहा हैए जो उनके पलायन का एक मुख्य कारण बना है।
पुलिस की कार्रवाई और डर का माहौल
हाल ही में वेतन वृद्धि की मांगों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई है। कामगारों के बीच अब इस बात का डर बैठ गया है कि कहीं उन्हें भी पुलिसिया कार्रवाई की चपेट में न ले लिया जाए। हालांकि बुधवार को मांगों पर सहमति बनने के बाद औद्योगिक सेक्टरों में काम शुरू होना थाए लेकिन स्थिति इसके उलट नजर आई।
औद्योगिक क्षेत्रों से रौनक गायबए मशीनों के पहिए थमे
बुधवार को जब फैक्ट्रियां खुलने का समय हुआए तो कई इकाइयों में कामगारों की उपस्थिति न के बराबर रहीरू
सन्नाटा: औद्योगिक सेक्टरों में वैसी रौनक नहीं दिखी जो आमतौर पर रहती है।
बंद मशीनें: श्रमिकों के अभाव में कई इकाइयों में मशीनें चालू नहीं हो सकीं।
गायब वाहन और रेहड़ियां: इकाइयों के बाहर लगने वाले वाहनों की कतारें और श्रमिकों के खान.पान के लिए लगने वाली रेहड़ियां भी गायब मिलीं।
उद्योग जगत को भारी नुकसान की आशंका
श्रमिकों के अचानक घर लौटने से उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है। कामगारों का यह पलायन यदि लंबा खींचता हैए तो उत्पादन पूरी तरह ठप हो सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते कामगारों का भरोसा नहीं जीता गया और महंगाई व सुरक्षा जैसे मुद्दों का समाधान नहीं हुआए तो नोएडा की औद्योगिक इकाइयों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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