Noida electricity mafia case: कैंडल मार्च के बाद 6 सितंबर को महापंचायत, SIT जांच की मांग

Noida electricity mafia case: नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के छिजारसी और चोटपुर कॉलोनी में लंबे समय से कथित बिजली माफिया और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे अवैध बिजली नेटवर्क के खिलाफ कॉलोनीवासियों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जल्द पक्की वैध बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने और पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर 6 सितंबर 2026 को महापंचायत आयोजित करने की चेतावनी भी दी गई है।

यह प्रदर्शन उन घटनाक्रमों के बाद हुआ जब मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (PVVNL) ने डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक छिजारसी फीडर क्षेत्र में वैध कनेक्शन करीब 3800 बताए जा रहे हैं, जबकि 13 हजार से अधिक घरों में अवैध तरीके से बिजली आपूर्ति का आरोप है। कुछ रिपोर्ट्स में आंकड़ा 20 हजार घरों तक पहुंचता है। हर घर से 500 से 1500 रुपये प्रतिमाह वसूली का आरोप है, जिससे हर महीने 1.3 से 1.8 करोड़ रुपये सिंडिकेट के पास जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। 2017 के आसपास नए कनेक्शन बंद होने के बाद ठेकेदारी व्यवस्था के जरिए यह नेटवर्क फैलने की बात कही जाती है।

कार्रवाई के दौरान तीन हजार से अधिक अवैध कनेक्शन काटे गए, 10 ट्रांसफार्मर जब्त किए गए और अवैध केबल-तार हटाए गए। कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई। निगम का कहना है कि वैध कनेक्शन नहीं काटे जा रहे, लेकिन कुछ वैध कनेक्शन भी प्रभावित हुए और उन्हें बहाल करने का प्रयास जारी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नियमित बिल भरने और मीटर लगने के बावजूद बिजली काट दी गई, जिससे गर्मी में बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों को भारी परेशानी हो रही है।

भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर (सुखबीर) खलीफा ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई है। उन्होंने मांग की कि भ्रष्टाचार और बिजली माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले अभियानकर्ताओं को झूठे मुकदमों में न फंसाया जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और किसी को संरक्षण न दिया जाए। परिषद ने 6 सितंबर को पुश्ता रोड पर महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है।

सूत्रों और अभियानकर्ताओं के हवाले से गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि अधिकारियों तक करीब 1.5 करोड़ रुपये पहुंचाए गए और अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये की मांग की गई। वर्ष 2010 से लगातार जांच की मांग की जा रही थी, लेकिन निष्पक्ष जांच नहीं हुई। उल्टा आवाज उठाने वालों को फंसाने की कोशिश का आरोप है। कॉलोनीवासियों ने CM योगी से पूरे मामले की SIT या CBI/ED जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की अपील की है। स्थानीय विधायक पंकज सिंह ने भी मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने सीएम कार्यालय और बिजली विभाग से बात की तथा वैध उपभोक्ताओं को राहत दिलाने और अस्थायी व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वैध कनेक्शन बहाल किए जाएंगे और जिनके पास वैध कनेक्शन नहीं हैं, उन्हें फिलहाल अस्थायी सुविधा दी जा सकती है।

प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के नेता और नोएडा सपा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए। सपा नेता आमतौर पर स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस कैंडल मार्च और बिजली संकट के मौजूदा चरण में उनकी कोई प्रमुख सार्वजनिक टिप्पणी या उपस्थिति रिपोर्ट नहीं हुई। अब सवाल यह है कि कथित घोटाले में निर्दोष लोग बलि का बकरा बनते हैं या वास्तव में दोषी बिजली माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों पर सरकार का चाबुक चलता है। कॉलोनीवासी पक्की बिजली और वैध कनेक्शन की मांग पर अड़े हुए हैं। 6 सितंबर की महापंचायत इस आंदोलन को नया मोड़ दे सकती है। प्रशासन और बिजली विभाग की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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