नोएडा डीएम मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, NSA हिरासत रद्द करने का फैसला निशाने पर

नोएडा (गौतमबुद्ध नगर)। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हुई हिरासत को रद्द करने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में नया मोड़ आ गया है। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (डीएम) मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है, जिसमें आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने और इसकी वसूली डीएम समेत जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से करने का निर्देश दिया गया था।

मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में आकृति चौधरी (लगभग 24-25 वर्षीय, दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास स्नातक) को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। प्रशासन का आरोप था कि वे हिंसा में शामिल थीं और मजदूरों को भड़काने में उनकी भूमिका थी। आकृति करीब पांच महीने जेल में रहीं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
 2 सितंबर 2026 को जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने आकृति की NSA हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि हिरासत का आधार सरकार की ओर से पेश की गई ऐसी कहानी पर टिका था, जिसे साबित नहीं किया जा सका। कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम द्वारा पारित हिरासत आदेश के तरीके पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत के मुताबिक, डीएम ने बिना पर्याप्त सबूतों और दिमाग लगाए आदेश पारित किया। उनके आचरण को “उपहास के योग्य” बताया गया और कहा गया कि वे छात्रा को “उदाहरण” बनाना चाहती थीं ताकि दूसरे लोग मजदूरों के समर्थन में बोलने से डरें।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अधिकारियों का ऐसा “तानाशाही” रवैया उत्तर प्रदेश को “ऑरवेलियन डायस्टोपिया” (जहां सरकार हर चीज पर नियंत्रण रखे) में बदल सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आकृति की हिरासत संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। आकृति की ओर से 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने 5 लाख रुपये मुआवजा उचित ठहराया। यह रकम सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि डीएम मेधा रूपम और मामले में जिम्मेदार अन्य अधिकारियों (एसएचओ तक) के वेतन से वसूली जाएगी। कोर्ट की नाराजगी को अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी दर्ज करने का आदेश दिया गया।

डीएम ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीएम मेधा रूपम ने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उनकी याचिका मुख्य रूप से 5 लाख रुपये मुआवजे और इसकी वेतन से वसूली वाले हिस्से को चुनौती देती है। इससे पहले यूपी सरकार भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का संकेत दे चुकी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस संबंध में अदालत में जिक्र किया था।

आकृति चौधरी कौन हैं और क्या स्थिति?
आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़ी थीं। NSA हिरासत रद्द होने के बावजूद वे अन्य आपराधिक मामलों में ज्यूडिशियल कस्टडी में बताई जाती हैं, क्योंकि उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।

इस बीच, सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि 5 लाख रुपये का मुआवजा कम है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इसे 20 लाख रुपये करने की मांग की है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा NSA के इस्तेमाल, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अदालती जवाबदेही के सवालों को फिर से चर्चा में लाया है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर आगे की सुनवाई का इंतजार है।

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