नोएडा। Noida Authority का प्लानिंग विभाग इन दिनों सुर्खियों में है। लखनऊ स्तर से विभाग की कार्यप्रणाली की जांच के आदेश मिलने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाप्रबंधक (जीएम) मीना भार्गव के कार्यकाल को लेकर हो रही है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक महाप्रबंधक मीना भार्गव की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, प्राधिकरण के अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया जारी होने की पुष्टि की है।
प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) सतीश पाल ने पहले बताया था कि लखनऊ से निर्देश प्राप्त हुए हैं कि महाप्रबंधक मीना भार्गव के कार्यकाल के दौरान कितने भवनों के नक्शे स्वीकृत किए गए और कितने कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए गए, इसकी विस्तृत जांच की जाए। इसी के आधार पर संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की जा रही है।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
जांच शुरू होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच के आदेश जारी हो चुके हैं तो आगे की कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात को लेकर चर्चाएं हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार आमतौर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती है, ऐसे में इस मामले में अभी तक कोई स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय सामने न आने से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाती है।
नक्शा स्वीकृति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में कई ऐसे मामले भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें कथित रूप से समय विस्तार (Time Extension) स्वीकृत किए बिना भवनों के नक्शे पास किए गए। आरोप है कि इससे प्राधिकरण को राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसी तरह सेक्टर-135 स्थित आईटी भूखंडों से जुड़े कुछ मामलों में भी नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन मामलों में अभी तक किसी सक्षम जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
सेक्टर-4 की इमारतों को लेकर भी चर्चा
सूत्रों का दावा है कि सेक्टर-4 में कुछ इमारतों का नक्शा सीमित निर्माण के लिए स्वीकृत किया गया था, लेकिन मौके पर अतिरिक्त निर्माण होने के बावजूद कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि जांच में ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भवन स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।
किसान कोटे के भूखंडों को लेकर भी आरोप
प्लानिंग विभाग से जुड़े कुछ लोगों पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे किसान कोटे के भूखंडों को बेहतर लोकेशन पर आवंटित कराने का दावा करते हैं। वहीं कुछ किसानों ने सेक्टर-49, बरोला स्थित हनुमान मंदिर के पास 75 मीटर रोड पर किसान कोटे के तहत आवंटित भूखंडों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की भी अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच से सामने आएगी सच्चाई
नोएडा प्राधिकरण के प्लानिंग विभाग की कार्यप्रणाली लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है। अब लखनऊ स्तर से शुरू हुई जांच से उम्मीद की जा रही है कि नक्शा स्वीकृति, कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया और किसान कोटे के भूखंडों से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर प्राधिकरण, शासन और स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।

