Noida road repair delays: नोएडा/ग्रेटर नोएडा। 5 अगस्त 2026 को नोएडा प्राधिकरण ने लगभग ₹1.35 करोड़ की लागत से सेक्टर-51/72 जंक्शन एवं परथला रोटरी पर 3 मीटर ऊंचाई के 200 कॉलम पोल स्थापित किए। प्राधिकरण का दावा है कि यह प्रमुख मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
लेकिन आम नागरिकों की प्रतिक्रियाएं अलग हैं। कई लोग कह रहे हैं कि डेढ़ साल से शहर की सड़कें टूटी-फूटी पड़ी हैं, जाम और गड्ढों से परेशानी हो रही है, फिर भी प्राधिकरण का फोकस रंगीन लाइटों और पेंटिंग पर ज्यादा है। “सड़क सुरक्षा और सुरक्षित सड़कों से कुछ लेना-देना नहीं। आम आदमी की समस्या प्राथमिकता नहीं है,” एक शिकायतकर्ता ने लिखा। कुछ ने बताया कि ये पोल पोस्टर लगाने के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। रखरखाव स्थापना से ज्यादा जरूरी है, ऐसी राय भी सामने आई।
टेंडर के बावजूद मरम्मत में सुस्ती
नोएडा प्राधिकरण ने 300 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर जारी कर निर्माण एजेंसियों का चयन कर लिया था। वर्क सर्कल-1 से 10 तक वरिष्ठ प्रबंधकों की जिम्मेदारी है। सीईओ ने सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने के लिए कई बैठकें कीं और सिविल के जीएम को निर्देश दिए। 15 जून, 30 जून और 15 जुलाई तक काम पूरा करने की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन जुलाई गुजर जाने के बाद भी ज्यादातर सड़कें उखड़ी हुई हैं। सेक्टर-24, 73, 33 समेत कई जगहों की हालत खराब बताई जा रही है। प्राधिकरण के जीएम एसपी सिंह का बयान है, “सड़क मरम्मत व नई सतह बिछाने के काम में तेजी के निर्देश सभी वर्क सर्कल को दिए गए हैं। हर एक वर्क सर्कल में सड़कों से जुड़े कितने प्रतिशत काम हुआ, इसकी समीक्षा जल्द ही की जाएगी।”
ताजा जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण ने खुदाई के बाद सड़क न सुधारने वाले ठेकेदारों पर सख्ती बढ़ाई है। सीईओ कृष्णा करुणेश ने सर्वे का आदेश दिया और सेक्टर-50 में एक ठेकेदार का 5 लाख रुपये का भुगतान रोका गया। सड़क खोदकर छोड़ने वालों पर 5 लाख तक जुर्माना लगाने की तैयारी है। बिटुमेन की आपूर्ति संबंधी देरी भी पहले समस्या बनी रही थी, लेकिन अब काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी कई क्षेत्रों में पैच वर्क की शिकायतें जारी हैं।
बारिश, जलभराव और अन्य समस्याएं
मानसून में हालात और बिगड़े। सेक्टर-51, 36 समेत कई जगह दीवारें गिरीं, नालियां टूटीं और बाधा बनीं। ग्रेटर नोएडा में सेंट जॉन्स स्कूल और निराला ग्रीनशायर के सामने सड़क पर गड्ढों में पानी भरने से रोजाना परेशानी हो रही है। स्थानीय निवासी कपिल भाटी ने बताया कि पानी भरे गड्ढों से बचते हुए वाहन निकालने में जाम लग जाता है। जल निकासी बेहतर करने की मांग की जा रही है। निराला ड्रीम आर्च सोसायटी में सप्लाई पानी में कॉलिफॉर्म और ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले। निवासियों को सीधे पानी पीने से मना किया गया। प्राधिकरण की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची। नागरिक शिकायतें भी लगातार आ रही हैं। गढ़ी चौखंडी के प्रतीक ई-विला मकान नंबर ई-41 के पास चारदीवारी के पीछे कूड़े का ढेर लगा है, जिससे बदबू और बीमारी का खतरा है (विशाल कांत झा, सेक्टर-1)। हाजीपुर गांव की गली नंबर 2 में ड्रेनेज खराब और सड़क टूटी होने से गंदा पानी जमा हो रहा है (सुशील अवाना, सेक्टर-104)।
प्राधिकरण की पहल और चुनौतियां
प्राधिकरण विकास कार्यों पर जोर दे रहा है। हाल ही में ग्राम सोरखा में करोड़ों रुपये की लागत से सीसी सड़क और नाली निर्माण जैसे काम चल रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में रिसर्फेसिंग और सर्विस रोड सुधार के टेंडर जारी किए गए हैं। लेकिन नागरिकों का आरोप है कि स्थापना पर ध्यान ज्यादा और रखरखाव पर कम है। सड़क सुरक्षा, जल निकासी और नियमित मरम्मत की मांग जोर पकड़ रही है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत को देखते हुए प्राधिकरण को सौंदर्यीकरण के साथ-साथ बुनियादी समस्याओं पर भी समान ध्यान देना होगा, ताकि आम आदमी को वास्तविक राहत मिल सके।

