Noida Authority Negligence: मामूरा के खुले नाले में गिरकर बुजुर्ग की मौत, लगातार हो रहे हादसों के बावजूद नहीं सुधरे हालात

Noida Authority Negligence: सेक्टर-66 में सुबह 9:30 बजे हुआ हादसा, प्राधिकरण ने घटनास्थल पर नाला होने से ही किया इनकार

नोएडा। शहर में खुले नालों की लापरवाही एक बार फिर एक बुजुर्ग की जान ले गई। सेक्टर-66 के मामूरा इलाके में बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे गली नंबर-6 में ओम अस्पताल के पास ट्रांसफॉर्मर के नजदीक खुले नाले में गिरने से 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक की पहचान मूलरूप से मेरठ निवासी रुमाल सिंह के रूप में हुई है, जो फिलहाल सेक्टर-66 के मामूरा में किराए पर रह रहे थे।

कैसे हुआ हादसा

पुलिस के अनुसार, बुधवार सुबह डायल-112 पर सूचना मिली कि मामूरा के नाले में एक व्यक्ति का शव पड़ा है। सूचना मिलते ही थाना फेज-3 पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नाले से बाहर निकलवाया। इसके बाद फोरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल की जांच कराई गई।

शुरुआती जांच में शव पर किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने नाले में डूबने से मौत की आशंका जताई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, जिसके बाद परिजन शव लेकर मेरठ रवाना हो गए।

एसीपी बोलीं- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी वजह

एसीपी दीक्षा सिंह ने बताया कि बुजुर्ग के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने कहा कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है और यदि रिपोर्ट में कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों और परिजनों से घटना की जानकारी जुटा रही है।

लघुशंका के दौरान असंतुलित होकर गिरने की आशंका

स्थानीय निवासियों का कहना है कि रुमाल सिंह नाले के पास बैठकर लघुशंका कर रहे थे, तभी असंतुलित होकर मुंह के बल नाले में जा गिरे और बाहर नहीं निकल पाए। पड़ोसियों के मुताबिक उनका शरीर भी भारी था, जिससे वह खुद को संभाल नहीं पाए। परिजनों ने पुलिस को यह भी बताया कि रुमाल रोज मोबाइल लेकर घर से निकलते थे, लेकिन बुधवार को वह बिना मोबाइल के ही निकले थे।

प्राधिकरण का दावा- घटनास्थल पर नाला है ही नहीं

घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्कल-5 ने चौंकाने वाला बयान दिया है। वर्क सर्कल प्रभारी राजकमल सिंह ने कहा कि जिस जगह बुजुर्ग की मौत हुई, वहां कोई नाला मौजूद नहीं है। उनके मुताबिक उस स्थान से कुछ दूरी पर केवल एक छोटी सी नाली है, जिसकी गहराई बहुत कम है और उसमें गिरने से किसी की मौत होना संभव नहीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय आसपास जलभराव जैसी कोई स्थिति नहीं थी। पुलिस और प्राधिकरण के इन परस्पर विरोधी बयानों ने मामले को और उलझा दिया है।

हादसे के बाद निवासियों में रोष

घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन मौके पर पहुंच गए। इलाके में लंबे समय से खुले नाले को लेकर लोग चिंता जता रहे थे, और अब जान जाने के बाद स्थानीय निवासियों में साफतौर पर आक्रोश देखा जा रहा है।

खुले नाले बने जानलेवा, कब जागेगा प्राधिकरण?

मामूरा की यह घटना नोएडा में खुले नालों और गड्ढों की खतरनाक स्थिति को एक बार फिर उजागर करती है। शहर के कई हिस्सों, खासकर गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों में आज भी बड़े नाले बिना रेलिंग या सुरक्षा दीवार के खुले पड़े हैं। बरसात के मौसम में इनमें पानी भर जाने से गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे पहले भी खुले नालों में गिरकर कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन स्थायी सुरक्षा इंतजाम आज तक नहीं किए गए।

हर बड़े हादसे के बाद जांच और सुरक्षा के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं। कई जगहों पर नालों की टूटी स्लैब, गायब ढक्कन और सुरक्षा रेलिंग की कमी लोगों के लिए रोजाना का खतरा बनी हुई है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

नोएडा में नाला हादसों की टाइमलाइन, जो खोलती है दावों की पोल

9 जुलाई 2026: सेक्टर-58 में टूटी स्लैब की वजह से नाले में गिरकर इंजीनियर आर्यन की मौत हुई थी। प्राधिकरण ने कहा था कि नाला कुछ फीट ही गहरा था।

16 जनवरी 2026: सेक्टर-150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में डूबने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। मौके पर बैरिकेडिंग नहीं थी।

8 अप्रैल 2026: सेक्टर-94 में हैबिटेट सेंटर निर्माण स्थल पर खुले छोड़े गए गड्ढे में नहाते समय छात्र हर्षित भट्ट (23) की डूबने से मौत हुई थी।

17-18 दिसंबर 2024: सेक्टर-73 में शौर्य बैंक्वेट हॉल के पास बाइक सवार अभिनव झा (36) नाले में गिर गए थे और रातभर घायल पड़े रहने से उनकी मौत हो गई।

27 दिसंबर 2021: सेक्टर-94 के सामने शहदरा नाले में कार गिरने से हार्दिक (25) की मौत हुई थी, जबकि उनका दोस्त स्नेहिल गंभीर रूप से घायल हुआ था।

2 मई 2018: सेक्टर-85-137 गोल चक्कर के पास कार समेत नाले में गिरने से रेडियो कंपनी की ग्रुप मैनेजर तान्या खन्ना (28) की पानी में दम घुटने से मौत हो गई थी।

इन हादसों की लंबी फेहरिस्त बताती है कि नोएडा में खुले नालों की समस्या नई नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही है। जरूरत इस बात की है कि प्राधिकरण महज बयानबाजी और जांच के दावों तक सीमित न रहे, बल्कि शहर के सभी खुले नालों की पहचान कर उन्हें ढकने और सुरक्षा रेलिंग लगाने का ठोस काम करे, ताकि आगे किसी और परिवार को इस तरह अपना सदस्य न खोना पड़े।

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