नोएडा साइबर क्राइम थाना ने एक एमबीबीएस‑एमडी डिग्रीधारी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है, जिस पर डेटिंग ऐप पर “श्रीशा उर्फ श्रीदेवी” नाम से फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर पुरुषों को भावनात्मक रूप से फंसाकर उनसे बड़े पैमाने पर धन ऐंठने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में दो शिकायतकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी ने कुल मिलाकर लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है, जबकि पुलिस का मानना है कि यह राशि और अधिक हो सकती है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के शिवालयम स्ट्रीट निवासी डॉ. पेदगावेदी रामाकृष्ण (37) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार रामाकृष्ण ग्रेटर नोएडा की टेक्नो प्रोव्यू सिटी सोसाइटी में अकेले किराए पर रह रहा था और उसके साथ दो पालतू कुत्ते भी थे। वह उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एमबीबीएस और एमडी करने के बाद हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में सर्जन के रूप में कार्य कर चुका था, लेकिन एक सर्जरी के खर्च कारण नौकरी छूटने के बाद लंबे समय से बेरोज़गार और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।
पुलिस ने बताया कि जून 2025 से आरोपी ने डेटिंग ऐप्स और फ्रेंड‑मैचिंग प्लेटफार्मों पर “श्रीशा/श्रीदेवी” का प्रोफाइल बनाकर आकर्षक तस्वीरें और बहाने रखकर कई पुरुषों से संपर्क स्थापित किया। आरोपी केवल चैट तक सीमित नहीं रहा; वह फोन पर भी लड़की की आवाज़ बनाकर बात करता और भरोसा जीतने के बाद शेयर बाजार तथा अन्य नकली निवेश योजनाओं में मोटा मुनाफा देने का लालच देकर रकम मंगवाता। जब पीड़ित अपना मूलधन या मुनाफा मांगते, तो आरोपी उन्हें ब्लॉक कर देता और फोन बंद कर फंसने वालों का संपर्क कट जाता था।
पीड़ितों में बेंगलुरु के जयनगर निवासी सैय्यद अय्यूब इमरान का नाम प्रमुख है। शिकायत के अनुसार आरोपी ने सैय्यद से करीब ₹4.40 लाख अपने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया खाते में ट्रांसफर कराए। एक अन्य पीड़ित वर्शित वर्मा के माध्यम से भी आरोपी ने खाते का दूर तक पहुँच हासिल कराकर रकम ऐंठी। शुरुआती शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल में दोनों पीड़ितों से कुल मिलाकर लगभग ₹10 लाख की ठगी की पुष्टि हुई, पर साइबर सेल का अनुमान है कि और भी पीड़ित तथा ठगी की वास्तविक रकम सामने आ सकती है।
जांच की रूपरेखा और गिरफ्तारी
साइबर पुलिस ने बताया कि सैय्यद अय्यूब इमरान ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत और फोन CDR, बैंक ट्रांज़ैक्शन रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल की। तकनीकी विश्लेषण से सभी लिंक ग्रेटर नोएडा की टेक्नो प्रोव्यू सिटी सोसाइटी तक पहुँचे, जिसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी को हिरासत में लिया।
गिरफ्तारी के समय आरोपी के कब्जे से वह मोबाइल बरामद हुआ, जिसे वह पीड़ितों से अश्लील चैट और ठगी की बातचीत के लिए उपयोग करता था। हालांकि आरोपी ने कई सिम कार्ड और मोबाइल फोनों को तोड़कर फेंकने की बात स्वीकार की, डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड ने उसे बेनकाब कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
साइबर जागरूकता का कड़वा नतीजा
पुलिस के अनुसार घटना चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि आरोपी ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साइबर सुरक्षा और जागरूकता सामग्री को भी अपराध की तकनीक सीखने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पुलिस के एक साइबर जागरूकता कार्यक्रम की सामग्री देखी थी और फिर इंटरनेट पर रिसर्च कर यह सीखा कि कैसे अपनी पहचान छिपाकर बार‑बार फोन नंबर और लोकेशन बदलकर बैंक खातों का ऑपरेशन किया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों के लिए तैयार यह जानकारी यदि गलत इरादे वाले लोग सीख लें तो उसकी दुरुपयोग की संभावना गंभीर होती है।
पीड़ितों का मामला और आगे की कार्रवाई
साइबर थाना अब यह पता लगाने में लगा है कि आरोपी ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है। पुलिस वर्शित वर्मा की भूमिका और उसके बैंक खाते के ज़रिए आरोपी द्वारा की गई गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि यह अकेला अपराधी था या किसी नेटवर्क का हिस्सा था। बैंकिंग फॉरेंसिक, मोबाइल लोकेशन‑डाटा और सोशल मीडिया‑एक्टिविटी की विस्तृत तकनीकी पड़ताल जारी है।
नोएडा साइबर क्राइम टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “प्रारम्भिक रिकॉर्ड और फोरेंसिक विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी ने जानबूझकर डिजिटल ट्रेल मिटाने के प्रयास किए। बावजूद इसके बैंक लेनदेन और सर्विस प्रोवाइडर रिकॉर्ड ने हमें आरोपियों की और गतिविधियों की जानकारी दी। हम पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं।”
समुदाय और चिकित्सा पेशे पर असर
इस घटनाक्रम ने चिकित्सा पेशे के प्रति समाजिक आस्था और उम्मीदों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और चिकित्सा समुदाय दोनों ही इस मामले को लेकर संवेदनशील हैं क्योंकि डॉक्टरों को अक्सर समाज में भरोसेमंद माना जाता है। जांचकर्ता बताते हैं कि आरोपी ने अपनी चिकित्सा योग्यता का लाभ उठाकर दूसरों के भरोसे का गलत इस्तेमाल किया।
नागरिकों के लिए चेतावनी
साइबर क्राइम थाना ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान प्रोफाइल्स पर तुरंत भरोसा न करें, किसी भी निवेश का निर्णय व्यक्तिगत और सत्यापित सलाह के बिना न लें, और ऑनलाइन संबंध बनाते समय बैंकिंग या संवेदनशील जानकारी तुरंत साझा न करें। पुलिस ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत NCRP या स्थानीय साइबर थाने पर दें ताकि समय रहते अन्य लोगों को बचाया जा सके।
अभी होने वाली प्रमुख आगामी कार्रवाई
आरोपी के सभी बैंक खातों और उससे जुड़ी वित्तीय ट्रांज़ैक्शन्स की फोरेंसिक ऑडिट। संदिग्ध सिम‑कार्डों और मोबाइल नंबरों के प्रोवाइडरों से कॉल‑डिटेल रिक्वेस्ट और लोकेशन‑डाटा का अनुरोध।संभावित और संदिग्ध पीड़ितों के संपर्क स्थापित कर और शिकायतें जुटाना। वर्शित वर्मा की भूमिका की गहन पड़ताल और उसके बैंक खाते के एक्सेस से संबंधित पूछताछ। यह निर्धारित करना कि आरोपी का कोई साझीदार या नेटवर्क तो नहीं है।

