Nepal’s devastating floods: मौत का आंकड़ा 900 पार, यूपी में गंडक नदी से 17 शव बरामद; सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों की तलाश जारी

Nepal’s devastating floods: काठमांडू/लखनऊ। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) की तबाही का दुखद सिलसिला जारी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में अचानक आई इस बाढ़ ने सैकड़ों जानें ले ली हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में मौतों का आंकड़ा 903 तक पहुंच गया है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 मौतें और करीब 546 लापता बताए जा रहे हैं, जिससे संयुक्त आंकड़ा 900 से अधिक मौतों और लगभग 4,800 लापताओं तक पहुंच गया है।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार सबसे ज्यादा शव चितवन (272), नवलपरासी पूर्व (207), नवलपरासी पश्चिम (151), नुवाकोट (95) और अन्य जिलों से बरामद हुए हैं। लगभग 10,450 लोगों को बचाया जा चुका है। लापताओं में 592 विदेशी नागरिक (भारत समेत 39 देशों के) और 933 जलविद्युत परियोजनाओं के मजदूर-कर्मचारी शामिल हैं।

यूपी में बहकर आए शव, पहचान की चुनौती

इस आपदा का असर भारतीय सीमा पर भी साफ दिख रहा है। नेपाल की भोटे कोशी नदी से शुरू हुई बाढ़ दक्षिण की ओर त्रिशूली में मिली और भारत में गंडक (नारायणी) नदी के रूप में प्रवेश कर सैकड़ों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई। गंडक नदी के तेज बहाव से मलबा, वाहन और शव यूपी तक बह आए। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में अब तक कुल 17 शव बरामद हो चुके हैं। कुशीनगर से 13 (खड्डा क्षेत्र समेत) और महाराजगंज से 4 शव निकाले गए। कई शव कई दिनों पानी में रहने के कारण सड़ चुके हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो गई है। महाराजगंज के 4 अज्ञात शवों (3 महिलाएं, 1 पुरुष) का पोस्टमॉर्टम और डीएनए सैंपलिंग के बाद नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया है। कुशीनगर के शवों की भी जल्द हैंडओवर की प्रक्रिया चलेगी। भारतीय अधिकारी नेपाल के साथ मिलकर शिनाख्त का काम कर रहे हैं। गंडक का बहाव अभी भी तेज है, इसलिए रेस्क्यू टीमें सावधानी से काम कर रही हैं। जलस्तर घटने पर और शव मिलने की आशंका है। सीमावर्ती गांवों और नदी स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

जलविद्युत सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूर

सबसे बड़ी चुनौती जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों की है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में 11 परियोजनाओं से करीब 933 कर्मचारी लापता हैं, जिनमें से सैकड़ों सुरंगों में फंसे बताए जा रहे हैं। अपर त्रिशूली-1 जैसी बड़ी परियोजनाओं में सैकड़ों लोग फंसे हो सकते हैं। नेपाली सेना, पुलिस के साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें नियंत्रित विस्फोट, भारी मशीनरी और खोज कुत्तों की मदद से मलबा हटा रही हैं। कुछ सुरंगों में प्रवेश कर कुछ शव बरामद हुए हैं और कुछ लोगों को बचाया गया है (अब तक सैकड़ों मजदूरों को विभिन्न स्थलों से निकाला जा चुका है), लेकिन कई जगह मलबा और पानी अभी बाधा बना हुआ है। भारत ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम (डीएनए विश्लेषण के लिए), सुरंग रेस्क्यू टीम और राहत सामग्री भेजी है। भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञ काठमांडू में नेपाली अधिकारियों के साथ शवों की पहचान में सहयोग कर रहे हैं।

स्कूल हेडमास्टर ने 900 छात्रों की जान बचाई

त्रासदी के बीच एक राहत भरी खबर भी आई है। नुवाकोट जिले के त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र दवाड़ी ने अंतिम समय में मिले चेतावनी कॉल पर तुरंत कार्रवाई कर करीब 900 छात्रों और 16 स्टाफ सदस्यों को ऊंची जगह पर भेज दिया। महज 14 मिनट में स्कूल खाली हो गया। उसके तुरंत बाद बाढ़ का पानी स्कूल को पूरी तरह बहा ले गया। दवाड़ी ने कहा कि अगर 10 मिनट देर हो जाती तो हम सब यहां नहीं होते। यह कहानी आपदा में समय पर चेतावनी और त्वरित निर्णय की अहमियत को रेखांकित करती है।

नदी तंत्र और सीमा-पार प्रभाव

यह आपदा हिमालय क्षेत्र की आपस में जुड़ी नदी प्रणालियों का दुखद उदाहरण है। भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी-गंडक सिस्टम के जरिए नेपाल के पहाड़ों में आई बाढ़ सैकड़ों किलोमीटर दूर भारत तक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर अस्थिरता ऐसे खतरों को बढ़ा रही है। नेपाल में पुनर्निर्माण का अनुमान अरबों डॉलर का है। अभी भी बचाव-खोज अभियान जारी है। परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों और मोर्चरी घूम रहे हैं। अज्ञात शवों का अस्थायी दफन भी शुरू हो गया है। अधिकारी जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दे रहे हैं और लोगों से नदी किनारे से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। यह त्रासदी याद दिलाती है कि हिमालयी आपदाएं किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहतीं। नेपाल, भारत और चीन के संयुक्त प्रयासों से ही आगे की राहत और रोकथाम संभव है।

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