Ghaziabad news राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मंगलवार को जनपद भ्रमण के दौरान डासना स्थित जिला कारागार का विस्तृत निरीक्षण कर संचालित सुधारात्मक एवं पुनर्वास गतिविधियों की सराहना की।
उन्होंने जेल परिसर की व्यवस्थाओं, बंदियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, शिक्षा एवं कौशल विकास कार्यक्रमों का अवलोकन किया और कहा कि आधुनिक कारागार केवल दंड देने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मसुधार और समाज की मुख्यधारा में पुन: शामिल होने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
उन्होंने जेल अधीक्षक सीताराम और उनकी टीम की विकसित किए गए सकारात्मक वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसी भी कारागार की सफलता केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि वहां चल रहे सुधारात्मक कार्यक्रमों से मापी जाती है।
उन्होंने विशेष रूप से बंदियों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि जेल में रह रहे लोगों को विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प, हस्तकला और रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रम बंदियों को रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने और रोजगार प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।
महिला बंदियों के लिए संचालित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए श्रीमती रहाटकर ने कहा कि महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई तथा अन्य स्वरोजगार आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण प्रदान करना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की क्षमता महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाती है और उन्हें समाज में नई पहचान दिलाने में मदद करती है। पुस्तकें किसी भी व्यक्ति के विचारों को नई दिशा देती हैं
उन्होंने कहा कि पुस्तकें किसी भी व्यक्ति के विचारों को नई दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम होती हैं। अध्ययन की आदत व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच विकसित करती है और जीवन में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। बंदियों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना एक दूरदर्शी और प्रशंसनीय कदम है।
विजया रहाटकर ने कहा कि कारागारों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें सुधार कर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में कार्य करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि बंदियों को शिक्षा, कौशल और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो वे रिहाई के बाद समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
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