Mamata Banerjee Convoy Attack: जूते-पत्थर बरसाए, कीचड़ पोता; बोलीं- ‘माथा फट जाता’

Mamata Banerjee Convoy Attack: कोलकाता/हलीशहर, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के काफिले पर रविवार (9 अगस्त 2026) को उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। उनकी कार पर जूते-चप्पल, पत्थर-ईंटें, पानी की बोतलें और कीचड़ फेंके गए। प्रदर्शनकारियों ने ‘चोर-चोर’ और ‘डाकू रानी’ जैसे नारे भी लगाए।

ममता बनर्जी टीएमसी कार्यकर्ता बिरजू केओट (जिन्हें बिरजू देओट भी कहा जा रहा है) के परिवार से मिलने जा रही थीं। बिरजू केओट, कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व टीएमसी पार्षद जेनी शर्मा केओट के पति थे। शुक्रवार को उन्हें वसूली, धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट के आरोप में हलीशहर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत दी थी। शनिवार सुबह वे थाने की लॉकअप में अचानक बीमार पड़ गए और काल्याणी के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें हिरासत में यातना दी गई, शरीर पर चोट के निशान और कान से खून आने की बात कही गई। पुलिस का कहना है कि मौत हार्ट अटैक से हुई, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है और जांच चल रही है।

घटना कैसे हुई?

ममता बनर्जी के साथ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और राज्यसभा सांसद डोला सेन भी मौजूद थीं। जैसे ही उनका काफिला हलीशहर (बीजपुर थाना क्षेत्र) पहुंचा, प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को घेर लिया। सफेद एसयूवी पर कीचड़ पोता गया, जूते-चप्पल और बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए। ममता बनर्जी ने बाद में मीडिया से कहा, “असामाजिक तत्वों ने पुलिस के सामने ही मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। हमला इतना गंभीर था कि अगर खिड़कियां खुली होतीं तो मेरा माथा फट जाता। हम सब मर सकते थे। मैंने जीवन में ऐसा हमला कभी नहीं देखा। पुलिस मूकदर्शक बनी रही और बीजेपी की रक्षा कर रही थी।” उन्होंने इसे पूर्व-नियोजित साजिश बताया और कहा कि उन्होंने पुलिस को पहले से अपनी यात्रा की सूचना दे दी थी, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे हत्या की कोशिश करार दिया और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर आरोप लगाया कि उनके निर्देश पर पत्थर फेंके गए।

बीजेपी की प्रतिक्रिया

बीजेपी ने हमले की निंदा की। राज्य बीजेपी अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने कहा कि नारेबाजी या काले झंडे दिखाना लोकतंत्र का हिस्सा हो सकता है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी पर जूते-पत्थर फेंकना निंदनीय है और यह बीजेपी की संस्कृति नहीं है। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी कहा, “यह न बंगाल की संस्कृति है, न बीजेपी की। ममता बनर्जी की कई गलतियां रही हैं, लेकिन कीचड़ फेंकना या जूतों की माला पहनाना स्वीकार्य नहीं। जो कोई बीजेपी के नाम पर ऐसा कर रहा है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मौके पर कोई परिचित बीजेपी चेहरा या झंडा नहीं दिखा। उन्होंने ममता बनर्जी पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि वे बिना पुलिस को पूरी सूचना दिए छुट्टी के दिन वकील लेकर पहुंचीं। उन्होंने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की और कहा कि परिवार न्याय चाहता है, राजनीति नहीं। मृतक के भाई शंभू केओट ने भी ममता से मिलने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ इंसाफ चाहिए।

पुलिस और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में ली और ममता के काफिले को सुरक्षित बाहर निकाला। बाराकपुर पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मौत के कारणों की जांच हो रही है, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखी जा रही है। टीएमसी ने स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग की है। यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रही है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि परिवार न्याय की मांग कर रहा है।

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