लोहागढ़ किला हत्याकांड: मंगेतर सिया और प्रेमी चेतन ने रची केतन की मौत की साजिश, अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलेगा मुकदमा

पुणे के कारोबारी परिवार के बेटे केतन अग्रवाल की मौत का मामला, जिसे 18 जून को शुरू में एक ट्रेकिंग दुर्घटना माना गया था, अब एक सुनियोजित हत्या की साजिश के रूप में सामने आ चुका है। पुलिस जांच में हर गुजरते दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, और अब महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने का फैसला किया है।

कैसे बदला हादसे से हत्या में मामला

घटना के तुरंत बाद मंगेतर सिया गोयल ने पुलिस को बताया था कि तेज हवाओं के बीच सेल्फी लेते समय केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में जा गिरे पुलिस ने शुरुआत में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की थी। लेकिन घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा गार्ड के बयान, सिया के व्यवहार में संदिग्ध रूप से दुख की कमी, और तकनीकी जांच ने पुलिस का शक गहरा कर दिया। पुलिस ने सिया का मोबाइल जब्त कर उसके कॉल रिकॉर्ड (CDR) की पड़ताल शुरू की, और पता चला कि जनवरी से जून के बीच सिया और एक युवक चेतन चौधरी के बीच लगभग 2,004 बार बातचीत हुई थी।

कैफे में बनी साजिश की पटकथा

जांच के अनुसार, हत्या से एक दिन पहले यानी 17 जून को सिया और चेतन पुणे के एक कैफे में करीब एक घंटे के लिए मिले थे, जहां सीसीटीवी फुटेज में दोनों शाम लगभग साढ़े चार बजे अंदर जाते और साढ़े पांच बजे बाहर निकलते दिखे। पुलिस का दावा है कि इस मुलाकात में सिया ने चेतन को किले की पूरी भौगोलिक जानकारी दी और हमले की जगह तय की गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली कोशिश नहीं थी, सिया और केतन इससे पहले 31 मई को भी लोहागढ़ किले गए थे, और 4 जून को होने वाली एक और यात्रा केतन की मां की अनुमति न मिलने से रद्द हो गई थी। 14 जून को एक और कोशिश हुई, जिसमें सिया ने सांप दिखने का बहाना बनाकर केतन को धक्का देने की कोशिश की, लेकिन केतन झाड़ी पकड़कर बच गया। अंततः 18 जून, जो सिया का जन्मदिन भी था, उस दिन दोनों ने अपना अंतिम प्लान अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि सिया के इशारे पर ही चेतन ने केतन को लोहागढ़ किले की गहरी खाई में धक्का दिया, और दोनों आरोपियों ने पूछताछ में पूरी साजिश कबूल कर ली है। बताया जाता है कि यदि यह योजना नाकाम होती, तो 20 जून के बाद सड़क दुर्घटना के जरिए हत्या करने की एक बैकअप योजना भी पहले से तैयार थी।

मकसद पर पुलिस का दावा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सिया इस शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और परिवारों के दबाव में सगाई के लिए राजी हुई थी, जबकि वह पिछले साल एक दिवाली पार्टी में मिले चेतन चौधरी से प्रेम करती थी।  पूछताछ में सिया ने यह भी बताया कि उसे केतन के गंजेपन और बातचीत में हल्के हकलाने जैसी बातें पसंद नहीं थीं।  हालांकि दोनों आरोपी अब एक-दूसरे पर दोष डाल रहे हैं सिया का कहना है कि उसने केतन को शादी तोड़ने के लिए कहा था पर वह राजी नहीं हुआ, जबकि चेतन का दावा है कि वारदात का दबाव सिया ने ही बनाया था।

कानूनी कार्रवाई और सख्ती

23 जून को दोनों आरोपियों को पुणे की वडगांव अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि चेतन के वकील रामशाहणे ने दावा किया है कि एफआईआर में उनके मुवक्किल के खिलाफ ठोस सबूत दर्ज नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर न्याय की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने के निर्देश दिए।

दोनों परिवारों की प्रतिक्रिया

केतन के पिता का आरोप है कि अगर सिया शादी नहीं करना चाहती थी तो रिश्ता खत्म कर सकती थी, बेटे की जान लेना बेहद दर्दनाक है। वहीं सिया के पिता प्रवीण गोयल ने भी गहरा दुख जताते हुए कहा कि केतन के परिवार के लिए यह क्षति अकल्पनीय है, जबकि सिया की मां पूजा गोयल ने कहा कि दोषी पाए जाने पर बेटी को भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। चेतन के पिता का पक्ष है कि उनके बेटे का इस साजिश में कोई हाथ नहीं है और सिया खुद को बचाने के लिए उसे फंसा रही है। मामले की जांच अभी जारी है, और पुलिस आगे के डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज तथा गवाहों के बयानों के आधार पर पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ रही है।

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