ला रेजीडेंसिया विवाद, ग्रेटर नोएडा CEO को हाईकोर्ट में तलब

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ला रेजीडेंसिया हाउसिंग सोसायटी में फ्लैटों के कब्जे, रजिस्ट्री और जरूरी वैधानिक मंजूरियों को लेकर चल रहा विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। CEO को अगली सुनवाई में यह बताना होगा कि परियोजना में उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के प्रावधानों और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

29 टावरों में सिर्फ 6 को OC मिलने का दावा

मामला फ्लैट आवंटी माधवी त्यागी की ओर से दाखिल रिट याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठाए और CEO को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।

सोसायटी निवासियों के अनुसार, ला रेजीडेंसिया परियोजना में कुल 29 टावर हैं, लेकिन इनमें से केवल छह टावरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यानी OC मिला है। आरोप है कि बाकी 23 टावरों में कई खरीदारों को आवश्यक प्रमाणपत्रों और मंजूरियों के बिना फ्लैटों का कब्जा दिया गया। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि संबंधित भवन को स्वीकृत नक्शे और निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है तथा वह रहने के लिए अधिकृत है। ऐसे में बिना OC कब्जा दिए जाने के आरोप ने फ्लैट खरीदारों की सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रजिस्ट्री और कंप्लीशन सर्टिफिकेट को लेकर खरीदार परेशान

निवासियों का कहना है कि कई खरीदारों ने फ्लैट की पूरी या लगभग पूरी कीमत चुका दी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक रजिस्ट्री नहीं मिली है। कुछ खरीदारों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट यानी निर्माण पूरा होने का प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। खरीदारों का आरोप है कि फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी वे कानूनी रूप से संपत्ति के पूर्ण मालिकाना हक से वंचित हैं। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण संपत्ति के हस्तांतरण, बैंक ऋण, पुनर्विक्रय और भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना में करीब 2,557 फ्लैट बताए जा रहे हैं। यदि प्रमाणपत्र और रजिस्ट्री से जुड़ी समस्याएं बड़े स्तर पर हैं, तो इसका असर सैकड़ों परिवारों पर पड़ सकता है।

फायर NOC और STP पर भी सवाल

मामले में सोसायटी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। निवासियों का कहना है कि परियोजना के लिए आवश्यक फायर विभाग की मंजूरी यानी फायर NOC उपलब्ध नहीं है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो ऊंची इमारतों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है। इसके अलावा, सोसायटी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP के ठीक ढंग से संचालित नहीं होने का भी दावा किया गया है। STP का उद्देश्य सोसायटी से निकलने वाले गंदे पानी का उपचार करना होता है। इसके संचालन में लापरवाही से स्वच्छता, पर्यावरण और आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में संबंधित प्राधिकरण और बिल्डर का पक्ष सामने आने के बाद ही होगी।

बिल्डर को भी नोटिस, जवाब दाखिल करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने मामले में बिल्डर को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अदालत के निर्देश पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी CJM के माध्यम से ला रेजीडेंसिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कराया जाएगा। अदालत यह स्पष्ट करना चाहती है कि परियोजना में फ्लैटों का कब्जा किस आधार पर दिया गया, किन टावरों को वैध प्रमाणपत्र प्राप्त हैं और किन टावरों में अभी भी मंजूरियां लंबित हैं। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि प्राधिकरण ने निर्माण, कब्जे और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की निगरानी किस स्तर पर की।

प्राधिकरण की जवाबदेही पर अदालत की नजर

हाईकोर्ट का आदेश केवल बिल्डर की भूमिका तक सीमित नहीं है। अदालत ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से यह भी पूछा है कि उसने अधिनियम और भवन सुरक्षा नियमों का पालन कराने के लिए क्या कार्रवाई की। प्राधिकरण पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह परियोजना में स्वीकृत नक्शे, निर्माण मानकों, अग्नि सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रावधानों और कब्जे से पहले आवश्यक प्रमाणपत्रों की जांच करे। यदि किसी परियोजना में जरूरी मंजूरियों के बिना कब्जा दिया गया, तो यह सवाल उठता है कि निगरानी और प्रवर्तन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।

15 सितंबर को अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। इस दिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि:

कितने टावरों को OC और CC जारी किए गए हैं।

किन टावरों में रजिस्ट्री लंबित है और उसकी वजह क्या है।

फायर NOC और अन्य सुरक्षा मंजूरियों की स्थिति क्या है।

STP का संचालन किस एजेंसी की निगरानी में हो रहा है।

बिना पूर्ण दस्तावेजों के कब्जा दिए जाने की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।

खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए प्राधिकरण आगे क्या कदम उठाएगा।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद ला रेजीडेंसिया के फ्लैट खरीदारों और निवासियों को उम्मीद है कि कब्जे, रजिस्ट्री और सुरक्षा मंजूरियों से जुड़े मुद्दों पर अब स्पष्ट कार्रवाई होगी। हालांकि, अंतिम स्थिति अगली सुनवाई में प्राधिकरण और बिल्डर के जवाब के बाद ही साफ होगी।

खरीदारों के लिए जरूरी दस्तावेज

ऐसी स्थिति में फ्लैट खरीदारों को संबंधित टावर के दस्तावेजों की लिखित स्थिति मांगनी चाहिए। इनमें ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, कंप्लीशन सर्टिफिकेट, फायर NOC, रजिस्ट्री या सब-लीज की स्थिति, प्राधिकरण की बकाया राशि और STP संचालन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। तैयार फ्लैट खरीदने या कब्जा लेने से पहले OC और CC की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना भी महत्वपूर्ण है।

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