Kamakhya Corridor Controversy: गुवाहाटी। मां कामाख्या मंदिर में प्रस्तावित कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर साधक बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर निर्माण से मंदिर की प्राकृतिक जलधारा प्रभावित हुई तो मां का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। “आत्मा मर जाएगी तो मंदिर संवारकर क्या होगा,” यह सवाल साधकों और याचिकाकर्ताओं ने उठाया है।
15 दिसंबर 2023 को 13 साधकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की बहन गीतिका भट्टाचार्य भी शामिल हैं। मंदिर के पुजारी ने भी अलग याचिका लगाई है। मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां सर्वे कराने के बाद फरवरी 2026 में निर्माण की अनुमति दे दी गई। लेकिन साधकों को सर्वे रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।
मां के दर्शन जल स्पर्श से होते हैं
कामाख्या मंदिर में देवी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक जलधारा के रूप में विराजमान हैं। भक्त गुफा में जाकर जल स्पर्श करके दर्शन करते हैं। यही जलधारा दस महाविद्याओं के रूप में प्रकट होती है। साधकों का डर है कि मल्टीलेवल पार्किंग, चौड़ी सड़कें और गहरी खुदाई से जल स्रोत बंद हो सकता है। नीलांचल पर्वत को शिव का रूप माना जाता है। यहां डीप कंस्ट्रक्शन से ऊर्जा प्रभावित होने का खतरा बताया जा रहा है। गीतिका भट्टाचार्य कहती हैं, “मां के अस्तित्व से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करूंगी। मेरे लिए सबसे पहले मां हैं। यहां जल का स्पर्श ही दर्शन है। बिना सर्वे और विशेषज्ञ राय के इतने बड़े प्रोजेक्ट का टेंडर कैसे दे दिया गया?”
देवप्रश्न में मिला आदेश
पश्चिम बंगाल के तंत्र साधक राजर्षि नंदी बताते हैं कि कोर्ट जाने से पहले साधकों ने ‘देवप्रश्न’ कराया। केरल के साधकों की मदद से मां से दो सवाल पूछे गए। जवाब मिला कि कोर्ट जाना चाहिए। यह सामान्य लड़ाई नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धर्मयुद्ध होगा। नतीजा सकारात्मक रहेगा और सरकार को रुकना पड़ेगा। हरियाणा के साधक योगेंद्र शर्मा कहते हैं कि यह भूकंप संवेदनशील क्षेत्र है। मल्टीलेवल पार्किंग के लिए गहरी नींव की जरूरत पड़ेगी, जो जल प्रवाह को नुकसान पहुंचा सकती है।
सर्वे रिपोर्ट पर सवाल
सरकार ने पहले एक कंपनी चुनी, फिर हटाई। बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (NIH) रुड़की को सर्वे का जिम्मा दिया गया। L&T कंपनी के जरिए यह काम कराया गया, जिसे कॉरिडोर का टेंडर भी मिला हुआ है|याचिकाकर्ताओं के वकील उपमन्यु हजारिका का आरोप है कि टेंडर पाने वाली कंपनी को ही सर्वे कराने का जिम्मा दिया गया। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। RTI में जवाब आया कि रिपोर्ट प्राइवेट कंपनी की है, इसलिए नहीं दी जा सकती।पुजारी के वकील ने रिपोर्ट के लिए हाईकोर्ट में इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दायर की है। कोर्ट ने सरकार से 30 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट न देने का कारण बताने को कहा है। साधक अगस्त के अंत तक और एप्लिकेशन दायर करने की तैयारी में हैं।
विशेषज्ञ की राय
NIH के पूर्व निदेशक सुधीर कुमार ने सलाह दी थी कि पहाड़ी की विस्तृत जियो-हाइड्रोलॉजिकल स्टडी जरूरी है। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार (GPR) से जल स्रोतों का मैपिंग कराना चाहिए। कोई भी निर्माण जल प्रवाह पर असर डाल सकता है।सरकार का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है। जवाब मिलने पर अपडेट किया जाएगा। कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। साधकों का मानना है कि विकास जरूरी है, लेकिन मां के मूल स्वरूप और जलधारा की रक्षा सबसे पहले होनी चाहिए।

