इजरायल चुनाव में डेडलॉक, नेतन्याहू और आइजेंकोट दोनों का दावा

जेरूसलम। इजरायल की संसद (क्नेसेट) के लिए मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 को हुए आम चुनाव में कोई स्पष्ट विजेता नहीं निकला। एग्जिट पोल के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी-धार्मिक गठबंधन और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेंकोट के विपक्षी ब्लॉक के बीच लगभग बराबरी की स्थिति बनी हुई है। दोनों खेमे 61 सीटों के बहुमत से काफी दूर हैं, जिससे देश में लंबे गठबंधन समीकरणों की संभावना बढ़ गई है।

मुख्य टीवी चैनलों के एग्जिट पोल के अनुसार कैन 11 और चैनल 13 ने दोनों ब्लॉकों को 51-51 सीटें दीं, जबकि चैनल 12 ने नेतन्याहू के ब्लॉक को मामूली बढ़त (52-49) दिखाई। किसी भी सर्वेक्षण में किसी पक्ष को 120 सदस्यीय क्नेसेट में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं मिलीं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी रहने का अनुमान है (लगभग 24 से 27 सीटें), जबकि आइजेंकोट की याशर पार्टी 20 से 23 सीटों के आसपास बताई जा रही है।

मतदान प्रतिशत 77.7 प्रतिशत रहा, जो पिछले दो दशकों में सबसे अधिक है और 2022 के चुनाव से करीब 7 प्रतिशत अंक ज्यादा है। अरब पार्टियों (जॉइंट लिस्ट और रा’अम) ने मजबूत प्रदर्शन किया और 17 से 19 सीटों तक पहुंचने का अनुमान है। ये पार्टियां संभावित किंगमेकर की भूमिका निभा सकती हैं, हालांकि दोनों मुख्य खेमे उनके साथ सरकार बनाने को लेकर हिचक दिखाते रहे हैं।

बुधवार को दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की। नेतन्याहू ने “मजबूत दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सरकार” बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जियोनिस्ट जनता ने उनके खेमे को स्पष्ट बहुमत दिया है। दूसरी ओर आइजेंकोट ने कहा कि जनता ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया है और नेतन्याहू को प्रधानमंत्री बने रहने का जनादेश नहीं मिला। उन्होंने नेतन्याहू से राजनीति से संन्यास लेने की अपील की और तेजी से सरकार बनाने का वादा किया।

अंतिम आधिकारिक नतीजे गुरुवार या शुक्रवार तक आने की उम्मीद है। इजरायल की खंडित राजनीति में छोटी पार्टियां गठबंधन वार्ता में अहम भूमिका निभा सकती हैं। अतीत में ऐसी वार्ताएं हफ्तों से लेकर महीनों तक चली हैं। नेतन्याहू इस बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 के हमले और उसके बाद की युद्ध स्थिति के बाद पहला आम चुनाव था। इसमें सुरक्षा, नेतृत्व और देश की दिशा को लेकर मतदाताओं का स्पष्ट संदेश सामने आया है, लेकिन सत्ता का फैसला अभी गठबंधन की बातचीत पर निर्भर करेगा।
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