नोएडा में IPS अधिकारी बनकर बुजुर्ग को किया डिजिटल अरेस्ट, 22 लाख रुपये की ठगी

नोएडा। नोएडा में साइबर ठगों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बड़ी ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। सेक्टर-37 के रहने वाले एक बुजुर्ग को खुद को मुंबई साइबर विभाग का आईपीएस अधिकारी बताने वाले ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर 22 लाख रुपये ठग लिए। मानसिक दबाव और गिरफ्तारी के भय में आए पीड़ित ने आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से ठगों के बताए बैंक खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आईपीएस अधिकारी बनकर किया फोन, आधार के दुरुपयोग की दी झूठी जानकारी

सेक्टर-37 निवासी करियामपुझा वर्गीज रप्पई ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 31 जुलाई 2026 को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई साइबर डिपार्टमेंट का आईपीएस अधिकारी गौतम बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड और पहचान का दुरुपयोग कर “श्री कुमार” नाम के व्यक्ति के नाम पर एक बैंक खाता खोला गया है। ठग ने कहा कि इस खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, मानव तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में किया गया है। उसने पीड़ित को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनका नाम गंभीर आपराधिक जांच में सामने आया है और यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बनाया मानसिक दबाव

शिकायत के अनुसार, ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए पीड़ित को लगातार फोन पर बनाए रखा। उन्हें किसी से बात न करने और मामले को गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए। इसके बाद सरकारी जांच और खाते के सत्यापन का हवाला देकर कहा गया कि उन्हें अपनी रकम एक निर्धारित बैंक खाते में ट्रांसफर करनी होगी, ताकि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ित मानसिक दबाव में आ गए और आरटीजीएस के जरिए 22 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए खाते में भेज दिए।

ठगी का एहसास होने पर साइबर थाने पहुंचे

कुछ समय बाद जब ठगों से संपर्क टूट गया और उन्हें अपनी रकम वापस नहीं मिली, तब पीड़ित को एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को नोएडा साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम पैसे के ट्रेल और आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों द्वारा अपनाया जाने वाला एक नया तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, साइबर सेल या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन पर डराते हैं। वे फर्जी केस, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, मानव तस्करी या आधार के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हैं और “जांच” के नाम पर बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।

पुलिस की अपील

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, साइबर सेल, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे, तो उसकी बातों में न आएं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी निजी खाते में पैसे जमा कराने के निर्देश देती है। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने से ठगी गई राशि को रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।

 

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