न्यूयॉर्क/तेहरान: संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि “तेहरान को कभी सरेंडर नहीं कराया जा सकता।” वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को पूरी तरह नष्ट कर देने की धमकी दी है। दोनों बयान ऐसे समय आए हैं जब कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि उनके देश पर दबाव डालकर उसे घुटने टेकने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा करेगा। यह बयान ऐसे मौके पर आया जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन और ईरान से जुड़े युद्धों पर चर्चा हो रही है और विश्व नेता सुरक्षा परिषद में भी शामिल हो रहे हैं।
इससे पहले ट्रंप ने ईरान को “एनिहिलेट” यानी पूरी तरह नष्ट कर देने की धमकी दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह रुख कूटनीतिक प्रयासों के बीच आया है। राजनयिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते की संभावना तलाशी जा रही है।
ईरान की ओर से हॉरमुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत के संकेत भी दिए गए हैं। हॉरमुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का निर्यात होता है। इस जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व के नेता एकत्र हुए हैं। यहां यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चर्चा हो रही है। सुरक्षा परिषद में एआई से जुड़े मुद्दों पर भी नेताओं को ब्रीफिंग दी गई। कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के तेज बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रहे हैं।
ईरान का रुख साफ है कि वह किसी भी तरह के दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। ट्रंप की धमकी और ईरानी राष्ट्रपति का जवाब दोनों ही पक्षों की अडिग स्थिति को दर्शाते हैं। फिलहाल कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हॉरमुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे किसी भी संभावित समझौते के केंद्र में रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र मंच पर दोनों पक्षों के बीच सीधे संवाद की संभावना पर नजरें टिकी हैं।
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