क्या नोएडा बना आतंकवादियों का सेफ ज़ोन?: उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (UP ATS) ने गुरुवार को नोएडा से दो संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार कर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स से जुड़ी एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान (20 वर्ष) और समीर खान (20 वर्ष) के रूप में हुई है। इनके कब्जे से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और एक चाकू बरामद किया गया है।
एटीएस के अनुसार, तुषार चौहान बागपत के रमाला गांव का मूल निवासी है और वर्तमान में मेरठ के कंकरखेड़ा इलाके में रह रहा था, जबकि समीर खान दिल्ली के पुरानी सीमापुरी इलाके का रहने वाला है। दोनों युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड चैनलों के जरिए पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी तथा उसके सहयोगियों (जैसे आबिद जट) और ISI हैंडलर्स के संपर्क में थे।1
पूछताछ में सामने आया है कि तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह को पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में चयनित स्थानों पर ग्रेनेड हमले करने तथा कुछ खास व्यक्तियों की टारगेट किलिंग का टास्क सौंपा था। इन निशानों में गैर-धार्मिक स्थल, मॉल, औद्योगिक क्षेत्र और कुछ राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। काम पूरा करने के बदले उसे 50 हजार रुपये एडवांस और सफलता पर 2.5 लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। साथ ही पासपोर्ट बनवाकर दुबई के रास्ते पाकिस्तान भागने की मदद का वादा भी किया गया था।
दूसरे आरोपी समीर खान को ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) का प्रचार करने, दीवारों पर नाम लिखने और नए युवकों को रिक्रूट करने का काम सौंपा गया था। दोनों ही युवा कट्टरपंथी पाकिस्तानी यूट्यूबर्स और गैंगस्टर्स के प्रभाव में आने के बाद इस नेटवर्क में शामिल हुए थे। एटीएस ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर इनकी गतिविधियों पर नजर रखी और नोएडा में उन्हें दबोच लिया। दोनों के पास से बरामद हथियारों की बारीकी से जांच की जा रही है। मामले में लखनऊ के एटीएस थाने में UAPA और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एटीएस अब इनके अन्य साथियों, पूरे नेटवर्क और संभावित अन्य टारगेट्स की पहचान करने के लिए रिमांड पर पूछताछ कर रही है।
यह कार्रवाई उन हालिया घटनाओं की कड़ी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए रेडिकलाइज कर आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं और अन्य राज्यों से भी समन्वय बनाए हुए हैं।
एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह साजिश भारत की शांति और सुरक्षा को भंग करने की थी, लेकिन समय पर कार्रवाई से इसे विफल कर दिया गया है। युवाओं को ऐसे फर्जी लालच और प्रोपगैंडा से बचने की जरूरत है।” इस घटना से एक बार फिर पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क की सक्रियता उजागर हुई है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क नजर रखे हुए हैं। आगे की जांच से और खुलासे होने की संभावना है।

