Gaur Chowk: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति गोलचक्कर का हाल दिन-ब-दिन बेहाल होता जा रहा है। न सड़कें ठीक हो पाई हैं, न जलभराव से निजात मिली है और न ही जाम की समस्या का कोई समाधान निकल पाया है। मुख्य मार्ग पर गड्ढे और जलभराव अब आम बात हो गई है। इस पूरे इलाके में गौड़ सिटी चौकी के सामने का हाल सबसे बुरा बताया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश और अंडरपास के निर्माण कार्य में हुई अनियमितता के कारण जो सड़क बनाई गई है, वह जरूरत से काफी नीचे है। नतीजा यह है कि हल्की बारिश में भी सड़क पर काफी पानी जमा हो जाता है और राहगीरों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
Gaur Chowk
विधायक तेजपाल नागर के क्षेत्र में हाल बदहाल
बता दें कि यह क्षेत्र दादरी विधानसभा में आता है, जिसके विधायक तेजपाल नागर हैं। कुछ हफ्ते पहले ही बनी सड़क जलजमाव के कारण उखड़ गई है। हालात यहीं नहीं रुकते, अंडरपास पर भी खतरा मंडराने लगा है।
ठेकेदार ने खोली घटिया निर्माण की पोल
एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां बहुत ही घटिया निर्माण कार्य किया गया था। उनके अनुसार सड़कें खराब होनी ही थीं क्योंकि निर्माण का स्तर काफी नीचे रखा गया। ठेकेदार ने आगाह किया कि अगर सड़क को ऊंचा नहीं किया गया तो जलभराव की समस्या हमेशा बनी रहेगी और अंडरपास गिरने का भी खतरा बना रहेगा।
शिकायतों पर नहीं हो रही सुनवाई
स्थानीय निवासी लगातार इस समस्या की शिकायत करते आ रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण के आला अधिकारियों तक इसकी गूंज नहीं पहुंच रही। हालात यह हैं कि अंडरपास का उद्घाटन नजदीक बताया जा रहा है, जबकि निर्माण कार्य अभी काफी अधूरा है।
फुट ओवरब्रिज का इस्तेमाल नहीं कर रहे लोग
हाल ही में बनाए गए फुट ओवरब्रिज का पैदल चलने वाले लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से वहां से गुजर रहे वाहनों से टकराने का खतरा बना रहता है। दैनिक जय हिन्द जनाब डिजिटल की टीम ने भी इस संबंध में मौखिक रूप से कई बार शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय राहगीरों ने भी ट्रैफिक में तैनात अधिकारियों से इसकी शिकायत की है। अधिकारियों की ओर से आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
निवासियों की मांग
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क के स्तर को ऊंचा किया जाए, जलनिकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आगामी मानसून में हालात और भी बिगड़ सकते हैं।

