ग्रेटर नोएडा में अवैध होर्डिंग पर कड़ी कार्रवाई, फेलिक्स अस्पताल पर 10 लाख जुर्माना, शहर भर में ‘अवैध प्रचार सफाया’ की तैयारी

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी (GNIDA) ने बिना अनुमति बस शेल्टर और सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग व बैनर लगाकर प्रचार करने के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। एक्टिव सिटीजन टीम की शिकायत के बाद सेक्टर बीटा-1 और गामा-1 के बस स्टैंड पर बिना एनओसी लगाए होर्डिंग लगाने वाले फेलिक्स अस्पताल पर अथॉरिटी ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है और एक सप्ताह के अंदर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है। अथॉरिटी ने चेताया है कि तय समय पर जुर्माना जमा न होने पर आरसी (रिकवरी) की कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत और कार्रवाई

सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने अधिकारियों को शिकायत में बताया कि सेक्टर बीटा-1 और गामा-1 के कई बस स्टैंडों पर फेलिक्स अस्पताल ने बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर होर्डिंग और पोस्टर लगा दिए हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि शहर में कई अन्य निजी अस्पताल, क्लीनिक, कोचिंग सेंटर, पीजी‑हॉस्टल और संपत्ति व्यापारियों द्वारा भी सार्वजनिक स्थानों, चौराहों, डिवाइडरों और बस स्टैंडों पर मनमाने ढंग से बैनर-पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिससे शहरी दृश्य-दूषण के साथ-साथ यात्रियों और राहगीरों की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हो रहा है।

अथॉरिटी की प्रतिक्रिया

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीनियर मैनेजर सनी यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बस स्टैंड पर अवैध होर्डिंग लगाने पर फेलिक्स अस्पताल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने बताया कि यह एक व्यापक अभियान का प्रारम्भ है और पूरे शहर में अवैध प्रचार के खिलाफ सतर्कता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा, “हम सार्वजनिक स्थानों की शुद्धता और सौंदर्य बनाए रखने के लिए शून्य सहनशीलता नीति अपनाए हुए हैं। बिना एनओसी किसी भी प्रकार के बैनर, पोस्टर या होर्डिंग लगाना प्रतिबंधित है।”

नागरिकों की शिकायतें और मांगें

शिकायतकर्ता हरेंद्र भाटी ने मीडिया से कहा कि जिन बस स्टैंडों पर अवैध होर्डिंग लगी हैं, वे पहले से जर्जर हालत में हैं और उनमें यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी भी खामियां हैं। उनकी मांग है कि केवल अवैध प्रचार हटाने ही नहीं बल्कि जर्जर बस स्टैंडों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बिना एनओसी चल रहे कोचिंग सेंटर और पीजी‑हॉस्टल पर तत्काल सीलिंग जैसी कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि नियमों का पालन सुनिश्चत हो सके।

आगे की कार्रवाइयाँ और संभावित अभियान

अधिकारियों ने बताया कि GNIDA की टीमें शहर भर में निरीक्षण तेज करेंगी और आवश्यकतानुसार अवैध होर्डिंग, पोस्टर और बैनर हटाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जारी शिकायतों का सत्यापन कर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माने और संचालन पर रोक जैसे दंडात्मक विकल्प लागू किए जाएंगे। अथॉरिटी ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अवैध प्रचार की थमी-ठहरी गतिविधियों की सूचना सक्रिय सिटीजन टीम तथा GNIDA की हेल्पलाइन पर दें ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।

स्थानीय व्यापारियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के दृष्टिकोण से

निजी अस्पतालों और कोचिंग संचालकों का कहना है कि प्रचार-प्रसार से उन्हें रोगियों और छात्रों तक पहुँचने में सहूलियत होती है, लेकिन अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि नियमों के अनुसार अनुमति लेकर ही विज्ञापन की अनुमति होगी। अवैध होर्डिंग हटाने और जुर्माने की कार्रवाई के बाद कई व्यवसायी अब अनुमति प्रक्रियाओं को लेकर जानकारी लेने GNIDA ऑफिस में संपर्क कर रहे हैं।

नागरिकों के लिए निर्देश

अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी भी सार्वजनिक जगह पर प्रचार, होर्डिंग या पोस्टर लगाने से पहले आवश्यक एनओसी और अनुमत शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन की सूचना मिलने पर अथॉरिटी तुरंत वैधानिक कार्रवाई करेगी। इससे न केवल शहर की सौंदर्य व सुरक्षा बनी रहेगी बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। यह कार्रवाई फेलिक्स अस्पताल के खिलाफ मिली शिकायत के बाद प्रारम्भ हुई है, और GNIDA का कहना है कि यदि अन्य उल्लंघन पाए गए तो उन पर भी समान कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों एवं व्यवसायियों से आग्रह है कि वे नियमों का पालन करें और अवैध प्रचार के खिलाफ चल रहे अभियान में सहयोग दें।

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