ग्रेटर नोएडा: Loan112 ऐप से लोन दिलाने के नाम पर ठगी, बिसरख पुलिस ने कॉल सेंटर चलाने वाले दो साइबर ठग किए गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा: थाना बिसरख पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए कॉल सेंटर के माध्यम से लोगों को अधिक लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त तीन मोबाइल फोन और एक नोटबुक (डायरी) बरामद की है। दोनों आरोपी अजनारा ली गार्डन सोसाइटी के एक फ्लैट से संचालित फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों को अपना निशाना बनाते थे।

गोपनीय सूचना पर हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर थाना बिसरख पुलिस ने अजनारा ली गार्डन सोसाइटी स्थित एक फ्लैट पर छापा मारकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सागर चौहान (23 वर्ष) निवासी न्याय खंड-1, इंदिरापुरम, गाजियाबाद और कुलदीप (25 वर्ष) निवासी ग्राम बरौली, थाना बल्देव, जिला मथुरा के रूप में हुई है।

Loan112 ऐप के नाम पर करते थे ठगी

पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे लोगों को फोन कर अधिक लोन दिलाने का लालच देते थे। इसके लिए Loan112 ऐप के माध्यम से आवेदन कराने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें फर्जी लोन अप्रूवल लेटर भेजे जाते थे। आरोपी पहले से लिए गए लोन को बंद कराने या नया अधिक लोन दिलाने के नाम पर पीड़ितों से रकम अपने फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। इस तरह वे लोगों से हजारों और लाखों रुपये की ठगी करते थे।

लोन लेने वालों का डेटा खरीदकर बनाते थे निशाना

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी विभिन्न लोन ऐप से लोन लेने वाले लोगों का डेटा हासिल करते थे। इसी डेटा के आधार पर वे संभावित ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें फर्जी ऑफर और लोन अप्रूवल लेटर भेजते थे। ठगी की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट कर देते थे, ताकि पुलिस तक कोई सबूत न पहुंच सके।

फर्जी खाते उपलब्ध कराने वाला अलग गिरोह भी सक्रिय

आरोपियों ने खुलासा किया कि फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाला एक अन्य व्यक्ति भी इस नेटवर्क में शामिल है। वह अपनी 20 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी 80 प्रतिशत नकदी नोएडा में अलग-अलग स्थानों पर पहुंचा देता था। आरोपी से संपर्क केवल व्हाट्सएप कॉल के जरिए अलग-अलग नंबरों से होता था और उसके बारे में कोई स्थायी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच

थाना बिसरख पुलिस अब इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों और डेटा सप्लाई करने वाले गिरोह की तलाश में जुटी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।

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