डॉक्टर से IAS तक: जब पूरा परिवार डॉक्टरी की राह पर हो, तो उस राह को छोड़कर सिविल सेवा का सपना देखना आसान नहीं होता। लेकिन हरियाणा के रोहतक की बेटी डॉ. अपराजिता सिंह सिनसिनवार ने यही किया और देश को एक बेहतरीन आईएएस अधिकारी मिली।
अपराजिता सिंह सिनसिनवार का पूरा परिवार चिकित्सा जगत से जुड़ा है। उनके पिता डॉ. अमर सिंह और माँ डॉ. नीता राजस्थान के भरतपुर में प्रैक्टिस करते हैं, जबकि उनके दोनों छोटे भाई उत्कर्ष और आयुष भी एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर चुके हैं। अपराजिता ने रोहतक के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) से 2017 में एमबीबीएस की डिग्री पूरी की। मेडिकल की पढ़ाई के बाद उन्होंने उसी साल UPSC की पहली कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हार न मानने वाली अपराजिता ने दोगुने जोश से तैयारी जारी रखी। तैयारी के दौरान उन्हें चिकनगुनिया हो गया और फिर फ्रैक्चर भी हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2018 में दूसरी बार UPSC परीक्षा देकर उन्होंने ऑल इंडिया 82वीं रैंक हासिल की और आईएएस बनीं|अपराजिता का कहना है कि उन्होंने सिविल सेवा इसलिए चुनी ताकि वे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में, बल्कि महिला सशक्तिकरण, पोषण और अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर भी एक प्रभावी प्रशासक के रूप में योगदान दे सकें।
वर्तमान में कहाँ हैं अपराजिता?
अपराजिता सिंह सिनसिनवार 2019 बैच की IAS अधिकारी हैं। वे पहले आंध्र प्रदेश कैडर में थीं, लेकिन IPS अधिकारी देवेंद्र कुमार से विवाह के बाद उनका कैडर उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात हैं। अपराजिता की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो विफलता और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखते हैं। उनका संदेश सीधा है अगर खुद से एक पक्का वादा कर लो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।

