दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं और शिक्षा सुधारकों का बड़ा प्रदर्शन जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक, CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में अनियमितताओं और पूरी शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और चेतावनी दी है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन चलेगा। प्रदर्शन में हजारों छात्र और युवा एकजुट हुए हैं। उन्होंने थाली-चम्मच बजाकर प्रतीकात्मक रूप से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारी भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतीकों का उपयोग कर रहे हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कहा कि यह किसी पार्टी या धर्म विशेष का आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं की भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने बाहरी तत्वों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में घुसकर माहौल खराब करने की कोशिश का विरोध किया और उन्हें ‘दलाल’ या ‘गोदी’ तत्व बताकर बाहर निकाला।
सोनम वांगचुक का जोरदार भाषण
लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने CJP प्रदर्शन में शामिल होकर छात्रों का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने छात्रों की सालों की मेहनत को धांधली से बर्बाद होने पर गहरा दुख व्यक्त किया। वांगचुक ने कहा, “शिक्षा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है, लेकिन परीक्षाओं में बेईमानी पूरे सिस्टम की विफलता है।” उन्होंने प्रतिभाशाली युवाओं का जिक्र करते हुए बताया कि डॉक्टर, इंजीनियर, IAS-IPS बनने के सपने देखने वाले युवा सिस्टम के दबाव में अपनी आत्मा बेचने को मजबूर हो जाते हैं। वांगचुक ने अपना उदाहरण देते हुए ‘एंटी-नेशनल’ का झूठा आरोप लगाकर जेल भेजे जाने का जिक्र किया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि देश के माहौल पर भी नजर रखें। “सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर व्यवस्था में पारदर्शिता लाएं,” उनका आह्वान था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जवाबदेही तय करने की मांग की।
पृष्ठभूमि और मांगें
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा मई में पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद CBI जांच शुरू हुई और कई गिरफ्तारियां हुईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तनाव के चलते 11-14 छात्रों की आत्महत्या की खबरें आईं। पिछले एक दशक में करीब 90 परीक्षा लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। प्रदर्शनकारी NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को भंग करने और शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं। CJP ने रातभर धरना दिया और दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रखा। दिल्ली पुलिस के साथ तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे सबसे अहम हैं और हिंदू-मुस्लिम विभाजन से ऊपर उठकर एकता का संदेश दिया। सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कुछ मामलों को ‘आइसोलेटेड’ बताते हुए पूरे मामले पर मीडिया से बात करने से इनकार किया है। छात्रों का संकल्प साफ है, “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, वरना आंदोलन जारी रहेगा।” यह प्रदर्शन न केवल NEET बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है और युवा भारत की आवाज बनकर उभर रहा है। आंदोलन का असर अब देश के विभिन्न हिस्सों में भी दिख रहा है, जहां इसी मुद्दे पर छोटे-बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। यह लड़ाई छात्रों के भविष्य और शिक्षा की अखंडता की है। सरकार को जल्द जवाबदेही तय करनी होगी, अन्यथा छात्र आंदोलन और तेज हो सकता है।

