Everest Hing Ban: FSSAI की बड़ी कार्रवाई, एवरेस्ट हींग समेत इन मसालों पर लगा बैन

 

Everest Hing Ban: नई दिल्ली/मुंबई, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शनिवार को लोकप्रिय मसाला ब्रांड एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और लालजी गोधू एंड कंपनी (एलजी ब्रांड) की कंपाउंडेड हींग (असाफोएटिडा) की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। लैबोरेटरी परीक्षणों में इन उत्पादों को सब-स्टैंडर्ड और मिसब्रांडेड पाया गया। यह कार्रवाई उपभोक्ता शिकायत के बाद शुरू की गई व्यापक निगरानी के नतीजे में हुई है।

FSSAI के अनुसार, कंपाउंडेड हींग में कच्ची हींग, गम अरेबिक, स्टार्च और आटे का मिश्रण होता है। नियमों के मुताबिक इसमें कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट होना अनिवार्य है। लेकिन एवरेस्ट के सैंपलों में यह मात्रा शून्य से 3 प्रतिशत तक ही मिली। एक सैंपल में यह 0 प्रतिशत, येलो हींग पाउडर में 3.29 प्रतिशत और ब्लैक हींग पाउडर में 4.4 प्रतिशत पाया गया। इससे साफ है कि निर्माता जरूरी कच्ची हींग का 30 से 40 प्रतिशत कम इस्तेमाल कर रहे थे।

लालजी गोधू के मामले में स्थिति और गंभीर रही। मुंबई यूनिट से लिए गए छह किस्मों के कच्चे हींग सैंपलों में स्टार्च की मात्रा 15 से 32 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि अधिकतम सीमा सिर्फ 1 प्रतिशत है। कच्ची हींग में अल्कोहल सॉल्यूबल एक्सट्रैक्ट भी न्यूनतम 12 प्रतिशत से कम था। पाउडर और लंप दोनों रूपों की कंपाउंडेड हींग सब-स्टैंडर्ड और मिसब्रांडेड बताई गई।

FSSAI ने मुंबई स्थित सेंट्रल लाइसेंस्ड यूनिट्स से कानूनी सैंपल लिए और गुजरात के उंबरगांव स्थित एवरेस्ट यूनिट का गुजरात FDA के साथ संयुक्त निरीक्षण भी किया। सभी सैंपल प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला में सब-स्टैंडर्ड पाए गए। नियमित निगरानी और विभिन्न जगहों से एकत्र सैंपलों में भी लगातार यही समस्या सामने आई।

तीन मसालों में भी गड़बड़ी
एवरेस्ट के एग करी मसाला, चिकन मसाला और गरम मसाले में भी नॉन-कंप्लायंस पाया गया। इनमें 5 प्रतिशत से अधिक नमक की मात्रा का लेबल पर उल्लेख नहीं था और मसाले की मात्रा भी घोषित नहीं की गई थी। हालांकि इन तीन उत्पादों पर बिक्री प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

दोनों कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उल्लंघनों को सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान जमा करें और सुनिश्चित करें कि केवल मानक उत्पाद ही बेचे जाएं। बाजार में मौजूद सब-स्टैंडर्ड उत्पादों का स्वैच्छिक रिकॉल भी करने की सलाह दी गई है। प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक कंपनियां नियमों का पालन नहीं करतीं। संतोषजनक अनुपालन न होने पर आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

यह कार्रवाई FSS (फूड प्रोडक्ट्स एंड फूड एडिटिव्स) रेगुलेशंस, 2011 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत की गई है। PIB मुंबई द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है। हींग भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे FSSAI मानकों वाले प्रमाणित उत्पादों का ही इस्तेमाल करें और किसी भी संदेह की स्थिति में स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से संपर्क करें। दोनों कंपनियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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