Digital Arrest: भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को करीब साढ़े पांच महीने यानी 165 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 66 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग अधिकारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और तीन किस्तों में रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली। मामले में भरतपुर साइबर थाना पुलिस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के संभल से मुख्य आरोपी ओमपाल (35) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश मीणा के अनुसार, पीड़ित रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी ने 2 फरवरी 2026 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अगस्त 2025 को पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। बातचीत के दौरान ठगों ने धीरे-धीरे उनके आधार कार्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी हासिल कर ली।
इसके बाद आरोपियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर फोन किया। उन्होंने झूठा दावा किया कि उन्होंने एक अपराधी को पकड़ा है, जिसके पास से शिक्षा अधिकारी के दस्तावेज मिले हैं। पीड़ित को डरा-धमकाकर ठगों ने उनके बैंक अकाउंट की पूरी डिटेल हासिल कर ली और अकाउंट में मौजूद पैसों के ‘वेरिफिकेशन’ की मांग की। जब अधिकारी ने इनकार किया तो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाया और गिरफ्तारी की धमकी देकर 165 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान शातिर अपराधियों ने पीड़ित से तीन किस्तों में 22 लाख, 35 लाख और 6 लाख रुपये सहित कुल 66 लाख रुपये अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए।
जनवरी 2026 में पीड़ित ने अखबारों में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी खबरें पढ़ीं। इसके बाद जब उन्होंने आरोपियों से सवाल-जवाब करना शुरू किया तो ठगी का अहसास हुआ। 2 फरवरी को उन्होंने साइबर थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस की विशेष टीम ने कॉल डिटेल और बैंक अकाउंट ट्रांजेक्शन को ट्रैक किया। जांच में सामने आया कि आरोपी ओमपाल (35), निवासी संभल (उत्तर प्रदेश) ने कंस्ट्रक्शन की एक फर्जी फर्म बनवाकर बैंक अकाउंट खुलवाया था, जिसमें ठगे गए 22 लाख रुपये कैश करवाए गए।
भरतपुर साइबर थाना पुलिस ने रविवार को ओमपाल को संभल से गिरफ्तार कर लिया। एसपी राजेश मीणा ने बताया कि इस मामले में पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फिलहाल आरोपी ओमपाल से पूछताछ चल रही है। गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है। पुलिस ने बताया कि ठगे गए रुपये अलग-अलग फर्जी फर्मों के खातों के जरिए कैश किए गए थे। यह मामला हाल के वर्षों में राजस्थान में सामने आए डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के कई मामलों में से एक है, जिसमें बुजुर्ग और रिटायर्ड अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि अज्ञात नंबर से आने वाली कॉल या वीडियो कॉल पर कभी भी दस्तावेज या बैंक डिटेल साझा न करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय साइबर थाने से संपर्क करें।

