उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बदरीनाथ हाईवे पर स्थित नगरासू (दमदमा साहिब) गुरुद्वारे में बीते चार दिनों से चल रहा तनावपूर्ण गतिरोध मंगलवार शाम आखिरकार खत्म हो गया। गुरुद्वारे की छत पर पारंपरिक हथियारों के साथ डटे निहंग सिख प्रशासन, पुलिस और पंजाब से पहुंचे निहंग प्रतिनिधियों की कई दौर की बातचीत के बाद नीचे उतरने को तैयार हुए। नीचे उतरने के बाद सभी निहंग सिख बुलेट मोटरसाइकिलों पर सवार होकर धार्मिक जयघोषों के साथ अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे प्रकरण की जड़ें 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं। हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के एक समूह का स्थानीय बाजार में पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था, जो बढ़कर तलवारबाजी तक पहुंच गया, जिसमें कुछ स्थानीय लोग और एक निहंग सिख घायल हुए। हंगामे के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसी गिरफ्तारी से नाराज होकर 20 जून की शाम छह से अधिक निहंग सिखों का एक दल नगरासू गुरुद्वारे पहुंचा। शुरुआत में लंगर के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से उनकी बहस हुई, क्योंकि वे अपने साथियों की रिहाई के लिए प्रबंधन से समर्थन चाहते थे। सहमति न बनने पर मामला बिगड़ गया और निहंग सिख गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल व छत पर चढ़कर डट गए तथा वहां जाने का रास्ता बंद कर दिया। प्रशासन के अनुसार यह मुख्य रूप से निहंग श्रद्धालुओं और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच का आंतरिक विवाद था, जिसे बाद में पुलिस के दखल ने और जटिल बना दिया।
72 घंटे से ज्यादा चला गतिरोध, छावनी में बदला इलाका
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया था। स्थानीय पुलिस के साथ आईटीबीपी और सेना के जवानों को भी तैनात किया गया। रविवार रात एक निहंग सिख ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जिसके बाद धीरे-धीरे बातचीत के रास्ते खुलने लगे। सोमवार को भी गतिरोध जारी रहा, लेकिन पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने बताया कि दो निहंग सिख छत से नीचे उतरकर प्रशासन से बातचीत करने लगे थे। मंगलवार को पंजाब से निहंग सिखों का एक प्रतिनिधि दल नगरासू गुरुद्वारा पहुंचा, जिसने छत पर मौजूद बाकी निहंग सिखों को समझाने में अहम भूमिका निभाई। डीएम-एसपी की समझाइश और पंजाब के डेलिगेशन से बातचीत के बाद सभी निहंग सिख शांतिपूर्ण ढंग से नीचे उतरने पर सहमत हो गए।
प्रशासन ने दी जांच की जानकारी
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने पुष्टि की कि गुरुद्वारे की छत पर मौजूद सभी निहंग सिख सुरक्षित नीचे उतर आए हैं और उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही कर्णप्रयाग की मूल घटना को लेकर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए दोनों मुकदमों की जांच चमोली जिले से हरिद्वार जिले स्थानांतरित कर दी गई है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने सिख संगठनों द्वारा पुलिस के व्यवहार पर लगाए गए आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह को सौंपी है, जिन्हें दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सरकार की प्रतिक्रिया
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर कर्णप्रयाग घटना पर चर्चा की। कालका ने बताया कि डीजीपी द्वारा घोषित कार्रवाई की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है और क्रॉस एफआईआर पर भी कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर सिख गुरुओं से जुड़े कई पवित्र धार्मिक स्थल हैं और सभी धर्मों का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। राज्य के गृह सचिव ने सोशल मीडिया पर इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब सामान्य हुई स्थिति
प्रशासन के अनुसार वर्तमान में नगरासू गुरुद्वारे में अरदास और लंगर सामान्य रूप से चल रहे हैं। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से शांति व संयम बनाए रखने की अपील की है। चार दिनों तक चले इस गतिरोध ने न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं, लेकिन संवाद, धैर्य और प्रशासनिक संयम के चलते मामला बिना किसी बड़ी अनहोनी के सुलझ गया।

