हुगली में TMC नेता की सरेआम बेइज्जती, जनता ने कान पकड़वाकर कराई उठक-बैठक, मांगी माफी

सत्ता जाते ही टूट रहा TMC का रुतबा, पार्टी में अंदरूनी बगावत भी चरम पर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुसीबतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सत्ता से बेदखल होने के बाद TMC नेताओं के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। पार्टी अंदरूनी कलह से गुजर रही है तो वहीं नेताओं को लेकर जनता का गुस्सा अब सरेआम फूट रहा है। ताजा मामला हुगली जिले का है, जहां भड़के हुए लोगों ने श्रीकांत घोष नाम के TMC नेता पर अपनी भड़ास निकालते हुए कान पकड़वाकर उनसे बीच सड़क पर उठक-बैठक कराई और उनसे सार्वजनिक माफी भी मंगवाई। यह घटना 10 जून 2026 को हुई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह गुस्साई भीड़ ने पार्टी के स्थानीय नेता को बीच बाजार में रोककर उन्हें जनता के सामने नाक रगड़ने पर मजबूर किया। इस घटना ने पूरे राजनीतिक माहौल में खलबली मचा दी है।

पृष्ठभूमि: चुनावी हार के बाद बदले हालात

गौरतलब है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को करारी हार का सामना करना पड़ा और ममता बनर्जी की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। इस करारी हार के बाद टीएमसी गहरे संकट में है। पार्टी का कैडर बिखर रहा है, नेता इस्तीफे दे रहे हैं और पुलिस स्थानीय बाहुबलियों को पकड़ रही है। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी नेताओं ने सुझाव दिया कि TMC को फिर से सड़क पर उतरकर जनता के बीच जाना होगा और जन आंदोलनों के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करनी होगी। कालीघाट में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कई विधायकों ने साफ कहा था कि केवल बंद कमरों में बैठकर रणनीति बनाने से पार्टी की खोई हुई जमीन वापस नहीं आएगी। लेकिन सड़क पर उतरने का यह अनुभव नेताओं के लिए बेहद कड़वा साबित हो रहा है।

पुष्पा वाले जहांगीर का भी हुआ हाल-बेहाल

हुगली की घटना से कुछ ही दिन पहले फाल्टा में भी TMC नेता की सरेआम बेइज्जती का एक और चर्चित मामला सामने आया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान खुद को ‘पुष्पा’ बताने वाले जहांगीर खान को पुलिस ने शॉर्ट्स पहनाकर सड़क पर घुमाया। जहांगीर खान को जबरन वसूली और अन्य आरोपों में गिरफ्तारी के बाद बंगाल पुलिस ने फाल्टा की सड़कों पर सफेद टी-शर्ट और हाफ पैंट में परेड कराई। जहांगीर खान की सबसे बड़ी पहचान उनकी ‘पुष्पा’ छवि रही थी। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्म के मुख्य किरदार से प्रेरित होकर खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया था जो किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। राजनीतिक और मीडिया जगत में उन्हें ‘TMC का पुष्पा’ कहा जाने लगा था। अब वही ‘पुष्पा’ हाफ पैंट में सड़कों पर घूमते नजर आए।

पार्टी में गहरी दरार, बागियों की फौज

जमीनी स्तर पर जनता के गुस्से के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी विद्रोह की आग धधक रही है। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद से ही संकट से घिरी टीएमसी के भीतर असंतोष की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। TMC के करीब 21 सांसद बगावत की राह पर हैं और पार्टी आलाकमान से बेहद नाराज चल रहे हैं। इधर विधानसभा में विपक्ष के नेता पद की औपचारिक मान्यता मिलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ बैठक की इस बैठक को TMC के अंदरूनी कलह का सबसे ताजा और सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।  हैरान करने वाली बात यह है कि कोई भी नेता या जनता इस दुर्दशा के लिए पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को दोष नहीं दे रहा, बल्कि सारा गुस्सा उनके भतीजे और उत्तराधिकारी अभिषेक बनर्जी पर निकल रहा है।

ममता की कोशिशें, पर नतीजा शून्य

TMC सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई और कई बागी विधायकों को फोन भी किया। हालांकि इससे पहले भी ममता द्वारा बुलाई गई बैठकों में बड़ी संख्या में विधायकों के अनुपस्थित रहने की घटनाएं हो चुकी हैं। TMC का पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में महज 35 विधायकों का साथ आना इस बात का संकेत था कि पार्टी नेतृत्व और उसकी एक जमाने में मजबूत जमीनी मशीनरी के बीच गहरी खाई बन चुकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हुगली जैसी घटनाएं अब अपवाद नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव की आहट हैं। जो नेता कल तक अपने इलाके में दबदबा रखते थे, आज वही जनता के सामने कान पकड़कर माफी मांगने पर मजबूर हैं। यह संकट सिर्फ एक पार्टी का अंदरूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के भविष्य पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। TMC के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ उन्हें सत्ता से बाहर होने का झटका लगा है, तो दूसरी तरफ संगठन के अंदर टूट का खतरा गहराता जा रहा है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल में TMC का यह पतन महज राजनीतिक हार नहीं है यह उस लंबे दौर का हिसाब है जब जनता ने अपना गुस्सा मन में दबाए रखा। हुगली की सड़क पर श्रीकांत घोष का कान पकड़कर उठक-बैठक करना और फाल्टा में जहांगीर खान की परेड ये दोनों तस्वीरें बता रही हैं कि बंगाल की जनता अब बोल रही है, और उसकी आवाज बहुत तेज है।

यह भी पढ़ें: iOS 27 बीटा: iPhone Air पर एप्पल का ‘सबसे बड़ा’ सॉफ़्टवेयर अपडेट, Siri अब Gemini AI से लैस, Liquid Glass पर मिला कंट्रोल

यहां से शेयर करें