फ्लाईओवर बना, पर भंगेल की तकदीर नहीं बदली, 608 करोड़ खर्च, फिर भी जाम, गंदगी और बेरोज़गारी से कराह रहे लोग

नीचे की सड़क अधूरी, लूप नदारद, रेहड़ी-पटरी वालों का रोज़गार छिना, प्राधिकरण के वादे हवा में, उत्तर प्रदेश की योजनाबद्ध नगरी नोएडा में भंगेल इलाका इन दिनों विकास और बदहाली के बीच की उस दरार का जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जिसे सरकारी आंकड़े नहीं, बल्कि सड़कों पर जूझते आम लोग बयान करते हैं। दादरी-सूरजपुर-छलेरा (DSC) मार्ग पर करोड़ों रुपये की लागत से बना भंगेल एलिवेटेड रोड (फ्लाईओवर) भले ही ऊपर से चालू हो गया हो, लेकिन ज़मीन पर हालात आज भी वैसे ही हैं — जाम, गंदगी, टूटी सड़कें और बेरोज़गारी।

608 करोड़ की परियोजना, फिर भी अधूरी तस्वीर

नोएडा प्राधिकरण द्वारा DSC रोड पर बनाई गई यह 4.5 किलोमीटर लंबी 6-लेन एलिवेटेड रोड आगाहपुर पेट्रोल पंप से NSEZ (नोएडा स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन) तक फैली है। इस परियोजना पर 608.08 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह प्रोजेक्ट जून 2020 में शुरू हुआ था और पहले दिसंबर 2022 में पूरा होना था, लेकिन बाद में समयसीमा बढ़ाकर सितंबर 2024 कर दी गई। इसके बावजूद काम समय पर नहीं हो सका और नवंबर 2025 में इसे ट्रायल बेसिस पर जनता के लिए खोला गया।  परंतु फ्लाईओवर का उद्घाटन समस्या का अंत नहीं बना। एलिवेटेड रोड के नीचे की सड़क पर सुधार कार्य फरवरी 2026 में शुरू हुआ है और इसे जून 2026 तक पूरा करने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी जब तक ऊपर गाड़ियाँ दौड़ रही हैं, नीचे अभी भी धूल, गड्ढे और अव्यवस्था का साम्राज्य है।

जाम से बेहाल: सुबह, दोपहर, शाम — हर वक्त घंटों की कैद

स्थानीय नागरिक राजेंद्र वर्मा का दर्द छलकता है जब वे बताते हैं — “ऊपर से फ्लाईओवर चालू है, ठीक है। लेकिन नीचे की सड़क अधूरी है। सिर्फ एक तरफ से आना-जाना हो रहा है। सुबह ऑफिस जाओ — जाम। दोपहर में बाज़ार जाओ — जाम। शाम को घर लौटो — जाम। ये कैसा विकास है?” स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के अनुसार जाम की दो बड़ी वजहें सामने आई हैं। पहली वजह एलिवेटेड रोड पर चढ़ने से पहले सड़क के एक तरफ बना फुटपाथ और दूसरी तरफ डिवाइडर — इससे सड़क संकरी हो जाती है और वाहनों की गति धीमी पड़ जाती है। दूसरी बड़ी वजह एलिवेटेड रोड पर चढ़ने से पहले बना यू-टर्न है, जहाँ सेक्टर-42, सेक्टर-45 सदरपुर और आसपास के इलाकों से आने वाले वाहन एकत्र होते हैं। सुबह और शाम के पीक आवर में स्थिति इतनी बिगड़ जाती थी कि लोग कई किलोमीटर लंबे जाम में फंस जाते थे।  एलिवेटेड रोड पर लूप न होने की वजह से लोगों को लंबे चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। नोएडा प्राधिकरण ने अब सेक्टर-49 और सेक्टर-107 चौराहे के पास 4 नए लूप बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित लागत करीब 67 करोड़ रुपये बताई जा रही है। टेंडर जारी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। यानी राहत के लिए जनता को और इंतज़ार करना होगा।

गंदगी और टूटी सड़कें: विकास की आड़ में अव्यवस्था

भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे सड़कें जगह-जगह टूट चुकी हैं। यहाँ गड्ढों के साथ कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है। भंगेल-सलारपुर मार्केट में फैली गंदगी और बदबू से व्यापारियों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित है। एलिवेटेड रोड के नीचे अतिक्रमण और कूड़े के ढेर लगे होने से हजारों ग्राहक रोज़ाना परेशान होते हैं।  सेक्टर 85 और 86 की स्थिति भी अलग नहीं है। स्थानीय निवासी सुनीता देवी बताती हैं — “नाले जाम हैं, कूड़े के ढेर हैं। डस्टबिन रखे हैं, लेकिन उठाने वाला कोई नहीं आता। बारिश होते ही यहाँ सड़कें नहीं, तालाब नज़र आते हैं।” नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने 10 मार्च 2026 को विभिन्न सेक्टरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई स्थानों पर गंदगी, मलबा, टूटी सड़कें और अव्यवस्था मिलने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। लेकिन फटकार और निर्देशों से ज़मीन पर कितना बदला, यह भंगेल की सड़कें खुद बयान कर रही हैं।

रेहड़ी-पटरी वालों का दर्द: विकास ने छीन लिया निवाला

इस पूरे विकास की सबसे दर्दनाक कहानी वे लोग सुना रहे हैं जो दशकों से इन्हीं सड़कों किनारे अपनी रोज़ी-रोटी कमाते आए थे। सब्जी विक्रेता रामकिशन कहते हैं “डिवाइडर बन गया, सड़क चौड़ी हो गई — लेकिन हमारे लिए जगह नहीं बची। हमने अथॉरिटी से पूछा तो कहा लखनऊ जाओ, डीएम से मिलो, सीएम से मिलो। भाई, हम गरीब आदमी हैं, इतना कहाँ जाएँगे? पेट भरना है, बस।” यह मामला अकेले रामकिशन का नहीं है। दर्जनों रेहड़ी-ठेला लगाने वाले परिवार इसी संकट में हैं। विकास की यह विडंबना है कि 608 करोड़ की परियोजना उनके लिए रोज़गार नहीं, बेरोज़गारी लेकर आई।

यातायात नियमों की अनदेखी भी बड़ी वजह

सिर्फ प्रशासन को दोष देना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी। स्थानीय निवासी अशोक मेहरोत्रा का कहना है — “जाम के लिए जनता भी कम जिम्मेदार नहीं है। बंद रास्ते से भी लोग जबरदस्ती गाड़ी घुसाते हैं, रॉन्ग साइड चलते हैं। यातायात नियमों का पालन हो, तब भी आधा जाम खुद ठीक हो जाए।” उन्होंने यह भी माना कि जब काम पूरा हो जाएगा, तो स्थिति में काफी सुधार आएगा बशर्ते लोग भी सहयोग करें।

बारिश से पहले ही सवाल खड़े

मई की गर्मी में भी जब हालात यह हैं, तो मानसून आने पर क्या होगा — यह सवाल हर भंगेलवासी के मन में है। अधूरे काम की वजह से भंगेल का बाज़ार अस्त-व्यस्त हो गया है। यहाँ सड़कें टूटी हुई हैं, जलभराव और गंदगी के कारण ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे यहाँ के व्यापारी भी भारी परेशानी में हैं।

प्राधिकरण का पक्ष और जनता की उम्मीद

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि एलिवेटेड रोड के नीचे सड़क सुधार कार्य जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही ध्वनि अवरोधक (साउंड बैरियर) लगाने की भी योजना है ताकि आसपास के इलाकों में शोर कम हो सके।  लेकिन जनता को इन वादों पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि यह परियोजना पहले 2022 में, फिर 2024 में पूरी होनी थी और अब जून 2026 की नई समयसीमा दी जा रही है।

विकास तब तक अधूरा है, जब तक आखिरी आदमी को राहत नहीं

भंगेल की यह कहानी उस बड़े सवाल को सामने रखती है जो आज नोएडा ही नहीं, पूरे देश के तेज़ी से बढ़ते शहरों में उठ रहा है — क्या बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बंधक बनाया जा सकता है? फ्लाईओवर बना, करोड़ों खर्च हुए — लेकिन जब तक नीचे की सड़क दुरुस्त नहीं होती, लूप नहीं बनते, नाले साफ नहीं होते और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए जगह सुनिश्चित नहीं होती — तब तक यह विकास अधूरा ही रहेगा।भंगेल की जनता इंतज़ार में है, लेकिन उसका धैर्य अब जवाब माँग रहा है।

यहां से शेयर करें