नोएडा। सड़कों पर नियमों की अनदेखी कर माल और यात्रियों को लेकर दौड़ रही बसों के खिलाफ कार्रवाई के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आग लगने वाली बस ने परिवहन व्यवस्था की निगरानी और कार्रवाई की हकीकत सामने ला दी। बताया जा रहा है कि यह बस दिल्ली से बिहार के बीच संचालित हो रही थी और इसके संचालन में कई यातायात नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके बावजूद बस के खिलाफ कार्रवाई केवल चालान काटने तक सीमित रही।
ऑनलाइन परिवहन एप पर 18 चालान, करीब 1.71 लाख रुपये का जुर्माना
बस के खिलाफ हुई कार्रवाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑनलाइन परिवहन एप पर इस वाहन के नाम से 18 चालान दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इन चालानों की कुल रकम करीब 1,71,500 रुपये बताई जा रही है। यानी बस संचालक पर पहले से ही बड़ी रकम का जुर्माना बकाया था, इसके बावजूद बस सड़क पर संचालित होती रही। हालांकि, परिवहन विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी में इस बस के खिलाफ कुल 36 चालान कटे होने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल यह है कि जब वाहन के खिलाफ लगातार चालान हो रहे थे तो उसके संचालन पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगाई गई?
चालान के बाद भी सड़क पर दौड़ती रही बस
सबसे बड़ा सवाल परिवहन विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। यदि किसी बस के खिलाफ बार-बार यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं और उस पर हजारों रुपये का जुर्माना दर्ज है, तो केवल चालान काटकर जिम्मेदारी पूरी मान लेना कितना उचित है?
मंगलवार को एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या परिवहन विभाग केवल ऑनलाइन चालान काटने तक सीमित है या ऐसे वाहनों की फिटनेस, परमिट, संचालन और सुरक्षा मानकों की भी नियमित जांच की जाती है?
दिल्ली से बिहार के बीच चल रही थी बस
जानकारी के मुताबिक, आग लगने वाली बस दिल्ली से बिहार के बीच संचालित की जा रही थी। लंबी दूरी के रूट पर चलने वाली बसों में यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी वाहन के खिलाफ लगातार नियम उल्लंघन के मामले दर्ज हो रहे हों, तो उसकी दोबारा जांच और आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की बनती है।
लेकिन इस मामले में सामने आए चालानों ने परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि आखिर कितने चालान के बाद किसी बस को सड़क से हटाने की कार्रवाई की जाएगी?
हादसे के बाद ही क्यों सामने आते हैं सवाल?
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर हुई इस घटना ने एक बार फिर परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आमतौर पर सड़क पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाती है, लेकिन केवल जुर्माना लगाने से क्या सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है?
अगर किसी वाहन के खिलाफ बार-बार चालान कट रहे हैं और फिर भी वह उसी तरह सड़कों पर दौड़ता रहता है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे में जरूरत केवल चालान की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की फिटनेस, परमिट और संचालन की गहन जांच कर प्रभावी कार्रवाई करने की है।
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