ग्रेटर नोएडा। दिवाली का त्योहार मनाने के लिए अपने घरों की ओर लौट रहे हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देर रात से ग्रेटर नोएडा के जीरो पॉइंट पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिली। आगरा, लखनऊ, देवरिया और बिहार के पटना समेत कई शहरों के लिए जाने वाले लोग घंटों से बसों का इंतजार करते नजर आए। हालात ऐसे हैं कि यात्रियों को तीन से चार घंटे तक बसों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। बस वालों की चांदी कट रही है। 5-5 हजार रूपये में टिकट बिक रहे है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जिन्होंने पहले से ऑनलाइन टिकट बुक करा रखे हैं। इसके बावजूद कई बसें निर्धारित समय पर नहीं पहुंच रही हैं। बसों के इंतजार में यात्रियों को सड़क किनारे घंटों बैठना पड़ रहा है। भीड़ के बीच छोटे बच्चों और परिवारों के साथ सफर कर रहे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे बैठने और सोने को मजबूर हैं।
ऑनलाइन टिकट के बाद भी नहीं मिल रही समय पर बस
यात्रियों का आरोप है कि ऑनलाइन टिकट बुक कराने के बावजूद बस संचालक समय पर सेवाएं उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। निर्धारित समय निकल जाने के बाद भी बसों का कोई अता-पता नहीं है। त्योहार के मौके पर घर पहुंचने की जल्दबाजी और बसों की कमी के कारण लोगों के सामने दूसरी बस का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है।
निजी बस संचालकों पर मनमाना किराया वसूलने का आरोप
यात्रियों ने निजी बस संचालकों और ट्रैवल एजेंसियों पर मनमानी करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सामान्य दिनों में जिस सफर का किराया कम होता है, दिवाली के मौके पर उसी के लिए दोगुना तक किराया मांगा जा रहा है। कुछ यात्रियों का आरोप है कि अधिक किराया देने से इनकार करने पर उन्हें बस में नहीं बैठाने और सफर कराने से मना करने की धमकी दी जा रही है।
त्योहार पर घर जाने की खुशी के बीच यात्रियों की परेशानी
दिवाली पर अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने की उम्मीद लेकर निकले लोगों के लिए सफर किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है। एक तरफ बसों की देरी और दूसरी तरफ मनमाना किराया यात्रियों की परेशानी बढ़ा रहा है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए परिवहन व्यवस्था के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या जिम्मेदार विभाग निजी बस संचालकों की मनमानी और यात्रियों की परेशानी पर ध्यान देंगे, ताकि लोगों को त्योहार पर घर पहुंचने के लिए इस तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े?
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