‘एक दिया उनके नाम का’: जो दूसरों के घर रोशन करते हैं, उनके जीवन में मुकेश शर्मा ने फैलाई खुशियाँ

नोएडा। दीपावली प्रकाश, उमंग और खुशियों का त्योहार है। इस दिन हर कोई अपनों के बीच पहुंचकर त्योहार को यादगार बनाना चाहता है। लेकिन हमारे समाज में एक ऐसा वर्ग भी है, जिसके लिए दीपावली का मतलब सिर्फ दिन-रात की मेहनत और दूसरों के घरों को रोशन करना होता है। अपने परिवार के लिए दिवाली मनाना उनके लिए केवल एक ख्वाब बनकर रह जाता है। ऐसे ही अनदेखे और निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले कामगारों की जिंदगी में खुशियों का उजाला फैलाने के लिए नोएडा के जाने-माने समाजसेवी एवं शिक्षाविद मुकेश शर्मा आगे आए हैं।

“कहना नहीं, करके दिखाना है” के अपने मूल वाक्य पर चलने वाले मुकेश शर्मा ने इस दीपावली पर समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का संकल्प लिया, जिसकी तरफ अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता।

‘एक दिया उनके नाम का’: जो सबके काम आते हैं, उनके काम आए मुकेश शर्मा

नोएडा की विभिन्न सोसाइटियों और सेक्टरों में दिन-रात सेवाएं देने वाले सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मचारी, माली और दैनिक कामगारों के बीच मुकेश शर्मा ने खुद जाकर दीपावली का जश्न मनाया। उन्होंने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर इन कामगारों को विशेष उपहार, मिठाइयां और फुलझड़ियां बांटीं।

उपहार पाकर न केवल कामगारों के चेहरे खिल उठे, बल्कि उनके बच्चों के चेहरे पर भी त्योहार की असली चमक देखने को मिली।

“दीपावली का असली अर्थ ही यही है कि खुशियां बांटी जाएं। हमारा समाज उस वर्ग के बिना अधूरा है जो हर दिन हमारे जीवन को आसान बनाता है। लेकिन विडंबना यह है कि जो सबके काम आता है, त्यौहार के समय उसके काम कोई नहीं आता। ‘एक दिया उनके नाम का’ जलाकर हम बस यह संदेश देना चाहते हैं कि यह दीपावली हर वर्ग के लिए समान रूप से खुशियों भरी होनी चाहिए।”

— मुकेश शर्मा, समाजसेवी एवं शिक्षाविद

 

एक दिया उनके नाम का’: जो सबके काम आते हैं, उनके काम आए मुकेश शर्मा

नोएडा की विभिन्न सोसाइटियों और सेक्टरों में दिन-रात अपनी सेवाएं देने वाले सुरक्षा गार्ड (Security Guards), सफाई कर्मचारी, माली (Gardeners) और अन्य दैनिक कामगारों के बीच पहुंचकर मुकेश शर्मा ने इस बार की दीपावली को उनके लिए यादगार बना दिया। उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया और इन मेहनतकश कामगारों के साथ कुछ वक्त बिताकर दीपावली का जश्न मनाया।

इस दौरान उन्होंने कामगारों को विशेष उपहार, मिठाइयां और फुलझड़ियां वितरित कीं। उपहार पाकर न केवल उन मेहनतकश कामगारों के चेहरे खिल उठे, बल्कि उनके मासूम बच्चों के चेहरों पर भी त्योहार की असली चमक और खुशी साफ झलक रही थी।

समाज के बिना अधूरा है हमारा जीवन: मुकेश शर्मा

मुकेश शर्मा के इस मानवीय और संवेदनशील कदम की नोएडा के विभिन्न सोसाइटियों और सेक्टरों में चौतरफा सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों और कामगारों का कहना है कि त्योहारों के समय जब हर कोई अपने परिवार में व्यस्त रहता है, ऐसे में किसी का इन मेहनतकश लोगों की सुध लेना और उनके साथ त्यौहार मनाना दिल को छू लेने वाली घटना है।

यह पहल समाज के अन्य सक्षम लोगों को भी यह प्रेरणा देती है कि वे अपने आसपास के उन लोगों का खास ख्याल रखें जो चुपचाप अपनी मेहनत से हमारे जीवन को बेहतर बनाने में दिन-रात जुटे रहते हैं।

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