ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में 7 प्रतिशत आबादी भूखंडों को लेकर विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सबसे गंभीर मामले उन भूखंडों से जुड़े हैं, जिन्हें कथित तौर पर एक ही आवंटी ने कई-कई लोगों को बेच दिया है। ऐसे मामलों में एक ही भूखंड पर दो या उससे अधिक लोग अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। इससे न केवल खरीदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने भी विवादों के निस्तारण की चुनौती खड़ी हो गई है।
इन बढ़ते विवादों को देखते हुए अब यमुना प्राधिकरण ने आबादी भूखंडों के मामलों के निस्तारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का फैसला किया है। इस SOP के माध्यम से ऐसे मामलों में स्पष्ट नियम और प्रक्रिया तय की जाएगी, जिनमें एक ही भूखंड पर कई लोगों ने दावा कर रखा है। प्राधिकरण का उद्देश्य विवादों के निस्तारण में पारदर्शिता लाना, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और आवंटियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाना है।
CEO राकेश कुमार सिंह ने भू-विभाग को दिए SOP तैयार करने के निर्देश
यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने भू-विभाग को आबादी भूखंडों से संबंधित मामलों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने और उसे प्रकाशित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अधिकारियों को बताया जाएगा कि अलग-अलग तरह के विवादों में किस प्रक्रिया का पालन करना है और किन दस्तावेजों के आधार पर दावों की जांच की जानी है।
सीईओ का मानना है कि आबादी भूखंडों की रजिस्ट्री और कब्जे की प्रक्रिया को पूरा कराया जाना है। ऐसे में यह जरूरी है कि जिन भूखंडों पर एक से अधिक लोगों ने दावा किया है, उनका निस्तारण स्पष्ट नियमों के आधार पर किया जाए। अभी तक इस तरह के मामलों में अलग-अलग परिस्थितियों और दस्तावेजों के कारण निर्णय लेने में जटिलताएं सामने आती रही हैं।
एक ही भूखंड कई लोगों को बेचने के मामलों में बनेगी स्पष्ट व्यवस्था
आबादी भूखंडों से जुड़े विवादों में सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है, जब किसी आवंटी ने एक ही भूखंड को अलग-अलग लोगों के नाम बेच दिया हो। ऐसे मामलों में प्रत्येक खरीदार अपने दस्तावेजों के आधार पर भूखंड पर अधिकार जताता है। कई बार एक ही भूखंड के लिए अलग-अलग बिक्री समझौते और दावे सामने आने से विवाद और उलझ जाते हैं।
नई SOP में ऐसे मामलों की जांच और निस्तारण के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित किए जाने की तैयारी है। इसमें संबंधित दस्तावेजों की जांच, दावेदारों की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। इससे अधिकारियों को मनमाने तरीके से निर्णय लेने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम करना होगा।
रजिस्ट्री और कब्जे की प्रक्रिया में भी आएगी पारदर्शिता
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों को मिलने वाले 7 प्रतिशत आबादी भूखंड लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। इन भूखंडों के आवंटन के बाद रजिस्ट्री और कब्जे की प्रक्रिया पूरी होना भी जरूरी है। लेकिन कुछ मामलों में विवादों के चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
प्राधिकरण की कोशिश है कि SOP लागू होने के बाद ऐसे मामलों की पहचान कर उनका समयबद्ध निस्तारण किया जाए। इससे वास्तविक हकदारों को उनका अधिकार दिलाने और वर्षों से लंबित शिकायतों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण लक्ष्य
SOP तैयार होने का एक बड़ा उद्देश्य अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करना भी है। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस प्रकार की शिकायत किस स्तर पर देखी जाएगी, जांच की प्रक्रिया क्या होगी और निर्णय लेने के लिए कितनी समयसीमा निर्धारित की जाएगी।
इस पहल से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के उन किसानों और आवंटियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो आबादी भूखंडों के विवादों के कारण लंबे समय से परेशान हैं। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि SOP में कितने स्पष्ट नियम बनाए जाते हैं और उनका जमीन पर कितना प्रभावी तरीके से पालन कराया जाता है। अब देखना होगा कि यमुना प्राधिकरण की नई SOP कब तक तैयार होकर सार्वजनिक होती है और इसके लागू होने के बाद एक ही भूखंड पर कई दावेदारों वाले विवादों का समाधान कितनी तेजी से हो पाता है।

