ECI का साफ जवाब: ज्ञानेश कुमार का कोई एकतरफा फैसला नहीं, तीनों SIR आदेश सर्वसम्मत

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों को लेकर उठे विवाद पर साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े सभी तीन प्रमुख आदेश सर्वसम्मति से पारित हुए थे। आयोग ने जोर देकर कहा कि इनमें कोई भी फैसला अकेले ज्ञानेश कुमार ने नहीं लिया। साथ ही फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा कि मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऑनलाइन प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा (declaration) को अलग कर दिया गया है।

सर्वसम्मति का दावा और आंतरिक आपत्तियों का जवाब

हाल के दिनों में रिपोर्ट्स आई थीं कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। इन आपत्तियों में फॉर्म-6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा, मतदाता सूची अपडेट की प्रक्रिया और IT सिस्टम से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए थे।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ECI ने सितंबर अंत में पूर्ण आयोग की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि जून 2025 का बिहार सहित पूरे देश के लिए SIR आदेश, अक्टूबर 2025 का 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का शेड्यूल और मई 2026 का 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का शेड्यूल—तीनों सर्वसम्मति से जारी किए गए थे। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय सभी तीन सदस्यों (मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त संधू और जोशी) की मंजूरी से लिए गए। आंतरिक नोट्स या सुझावों को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताया गया, न कि औपचारिक असहमति।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र नीतिगत मामलों या IT डिवीजन से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़े थे। संबंधित कार्य-आवंटन आदेश लागू भी नहीं किए गए थे।

फॉर्म-6 पर ECI का रुख: मूल फॉर्म अपरिवर्तित

फॉर्म-6 (नए मतदाता पंजीकरण के लिए वैधानिक फॉर्म) को लेकर भी विवाद रहा। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ऑनलाइन फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़ दी गई थी, जिसमें आवेदक या उनके माता-पिता/दादा-दादी का पिछले SIR से लिंकेज मांगा जाता था। दो चुनाव आयुक्तों ने इसे वैधानिक नियमों के बिना बदलाव बताते हुए आपत्ति जताई थी।

ECI का स्पष्टीकरण है कि मूल फॉर्म-6 (Registration of Electors Rules, 1960 के तहत) में कोई बदलाव नहीं किया गया। SIR के दौरान अतिरिक्त घोषणा (Annexure D) जोड़ी गई थी, जिसका उद्देश्य दस्तावेजों की आवश्यकता को सरल बनाना था। आयोग का कहना है कि यह व्यवस्था बिहार SIR आदेश में शामिल थी और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित प्रक्रिया को बरकरार रखा था।

सितंबर 2026 के अंत में आयोग ने फैसला लिया कि यह अतिरिक्त घोषणा अब केवल उन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू रहेगी जहां SIR चल रहा है। जहां SIR पूरा हो चुका है या शुरू नहीं हुआ है, वहां केवल मानक फॉर्म-6 ही भरा जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल (ECINET) पर भी इस घोषणा को अलग कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला

ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अंतरिम राहत (CEC को निलंबित करने या सर्वसम्मति अनिवार्य करने) देने से इनकार करते हुए केंद्र, ECI, ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि वह रिकॉर्ड देखकर तय करेगी कि फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए गए या नहीं। यदि कोई फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया गया तो उसे रद्द किया जा सकता है।

फॉर्म-6 के संशोधन पर CJI ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत रिकॉर्ड मांगकर देखेगी कि बदलाव किसने किए।

ECI का यह रुख उस समय आया है जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया और आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं। आयोग का जोर है कि SIR एक वैधानिक और स्थापित प्रक्रिया है, जिसके प्रमुख आदेश सामूहिक रूप से लिए गए। मतदाताओं की सुविधा के लिए कई कदम भी उठाए गए हैं, जिनमें नोटिस प्रक्रिया को सरल बनाना और कुछ राज्यों में समय-सीमा बढ़ाना शामिल है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। आगे की सुनवाई में आयोग द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड निर्णायक साबित होंगे।

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