नोएडा कैफे अग्निकांड: साहिल शर्मा की मौत के बाद पिता ने उठाए सुरक्षा लापरवाही के सवाल, संचालक-ठेकेदार पर केस

नोएडा। थाना सेक्टर-126 क्षेत्र के रायपुर गांव में एक कैफे में भड़की आग में 24 वर्षीय साहिल शर्मा की झुलसने से मौत के मामले में अब नया मोड़ आया है। मृतक के पिता दिलीप चंद ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि कैफे में निर्माण, फिनिशिंग और बिजली फिटिंग के दौरान आवश्यक अग्नि-सुरक्षा इंतजाम नहीं रखे गए, जिसके चलते हादसा हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कैफे संचालक और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे भड़की आग?

हादसा 24 अक्टूबर को दोपहर करीब ढाई बजे हुआ, जब रायपुर गांव में एमिटी यूनिवर्सिटी के पास कैफे के फूड स्टॉल पर मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक आग भड़की और टीन शेड से बनी दुकानों में तेजी से फैल गई। आग की चपेट में कुल पांच दुकानें आईं, जबकि घटनास्थल से छह छोटे एलपीजी सिलेंडर फटने की आवाजें आने की बात सामने आई। आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की छह गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत की। आग बुझने के बाद दमकलकर्मियों ने दुकान के अंदर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें दीवार के पास साहिल का शव मिला। पुलिस के अनुसार उनका शरीर 70 प्रतिशत से अधिक झुलस चुका था; उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पिता ने उठाए गंभीर सवाल

मृतक के पिता दिलीप चंद ने थाना सेक्टर-126 में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार साहिल कैफे में निर्माण, फिनिशिंग और बिजली फिटिंग का काम कर रहा था। पिता ने आरोप लगाया कि काम के दौरान न तो जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन हुआ और न ही अग्नि-सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी रोकी गई। उन्होंने पूछा कि जब ऐसा खतरनाक काम चल रहा था, तो बिना सुरक्षा इंतजाम के काम कैसे चल रहा था? पिता ने कैफे संचालक, बिजली फिटिंग व फिनिशिंग का काम कराने वाले ठेकेदार और काम के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

पुलिस ने शिकायत के बाद कैफे संचालक और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी सोमनेश कुमार सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता के बेटे अन्य कर्मचारियों के साथ काम कर रहे थे और इसी दौरान परिसर में आग लग गई, जो आसपास की दुकानों तक फैल गई। फिलहाल पुलिस आग लगने के सटीक कारणों का पता लगा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में वेल्डिंग कार्य को संभावित कारण बताया गया है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक वास्तविक कारण की पुष्टि तकनीकी जांच और गवाहों के बयानों के बाद ही होगी।

सवाल: क्या रोका जा सकता था हादसा?

यह घटना उन अस्थायी फूड आउटलेट्स और निर्माणाधीन स्थलों पर अग्नि-सुरक्षा के लगातार बढ़ते सवालों को फिर उजागर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार वेल्डिंग, बिजली फिटिंग या गैस सिलेंडर के पास काम करते समय अग्निशामक यंत्र, ज्वलनशील सामग्री से दूरी, प्रशिक्षित कर्मचारी और तुरंत निकासी की व्यवस्था जरूरी होती है। इस मामले में पिता का आरोप है कि ये बुनियादी इंतजाम नहीं थे, हालांकि यह अभी जांच का विषय है।

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