नई दिल्ली/बेंगलुरु, भारत के सत्ताधारी दल भाजपा के वैचारिक संगठन आरएसएस की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने मंगलवार को केंद्र सरकार से एलन मस्क की स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की अनुमति न देने की मांग की है। संगठन ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है।
यह मांग उस समय आई है जब स्टारलिंक के भारत में लॉन्च में चार साल की देरी को लेकर एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच सार्वजनिक विवाद छिड़ा हुआ है। मस्क ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और अंबानी पर आरोप लगाया था कि वे अंबानी की रिलायंस जियो को फायदा पहुंचाने के लिए स्टारलिंक को रोक रहे हैं। मस्क ने एक्स पर सवाल किया था, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
संचार मंत्रालय ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि स्टारलिंक, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल समर्थित सैटेलाइट सेवाओं के लिए सुरक्षा आकलन चल रहा है। मंत्रालय ने किसी भी पक्षपात या भेदभाव के आरोपों को “बेबुनियाद और गलत” बताया था।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने बयान में कहा कि अगर अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भारतीय आयात पर ऊंचे टैरिफ लगाता है, तो भारत भी अपनी वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के आधार पर स्टारलिंक को ब्लॉक करने का पूरा हक रखता है।
महाजन ने कहा कि स्टारलिंक की तकनीक से सुरक्षा संबंधी आपात स्थितियों में इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित करना और भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक को घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर से गुजरना सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने दिल्ली में सीईसी विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के बीच सोशल मीडिया अक्सर अफवाहें और राष्ट्र-विरोधी नैरेटिव फैलाता है। ऐसे में इंटरनेट बाधित करना जरूरी होता है।
संगठन का मानना है कि स्टारलिंक को रोकने से भारत को स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट क्षमताएं विकसित करने का मौका मिलेगा, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों के लिए। महाजन ने मस्क के बयानों की भी आलोचना की और कहा कि स्टारलिंक को सुरक्षा संबंधी स्पष्टीकरण देने के बजाय भारतीय व्यवसायों और सरकार पर आरोप लगाने का रास्ता चुना गया।
स्टारलिंक पहले ही 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त कर चुका है और भारत में वर्षों से नियमों का पालन कर रहा है। भारत सरकार के अनुसार तीनों कंपनियां (स्टारलिंक, जियो और वनवेब) लगभग एक ही चरण में हैं और सुरक्षा क्लियरेंस तथा स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार कर रही हैं। यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका व्यापार तनाव और घरेलू सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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