मुंबई। अभिनेत्री और राजनेता हेमा मालिनी एक बार फिर अपने पसंदीदा कला रूप शास्त्रीय नृत्य के जरिए मिथकीय संसार में लौट आईं। 77 वर्षीय अभिनेत्री और भरतनाट्यम डांसर ने नवरात्रि के पहले दिन, 11 अक्टूबर को अपने लोकप्रिय बैले “दुर्गा” में देवी दुर्गा का किरदार निभाकर मंच पर वापसी की और सोशल मीडिया पर फैंस को हैरान कर दिया।
हेमा के लिए यह प्रस्तुति महज एक और शो नहीं थी, बल्कि दशकों से संजोई गई कला के माध्यम से स्त्री शक्ति की कहानी को जीवंत करने का एक अवसर था। उन्होंने तेलंगाना में अग्रवाल समाज के आग्रा डांडिया नवरात्रि समारोह के दौरान क्लासिक कन्वेंशन सेंटर में यह प्रस्तुति दी। इस आयोजन में महाराजा अग्रसेन जयंती भी मनाई गई।
“खुद को धन्य महसूस किया”
कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए हेमा मालिनी ने इस खास अनुभव के बारे में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि नवरात्रि के पहले दिन अपने सबसे लोकप्रिय बैले दुर्गा का मंचन करना एक प्यारा और खास एहसास था, और उन्होंने खुद को सच में धन्य महसूस किया।
फैंस ने जमकर की तारीफ
इन तस्वीरों पर फैंस की ओर से खूब प्रशंसा मिली। प्रशंसकों ने उनकी मंच उपस्थिति और 77 की उम्र में भी नृत्य के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। कई यूजर्स ने उन्हें “हमेशा की तरह ग्रेसफुल” और उनकी प्रस्तुति को “बेहद दिव्य” बताया। एक फैन ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि वृंदावन में हेमा से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी बेटी को जो स्नेह दिया था, वह आज भी याद है।
आस्था और कला का संगम
हेमा मालिनी के लिए नवरात्रि के दौरान दुर्गा का किरदार निभाना आस्था और कलात्मक अभिव्यक्ति दोनों से जुड़ी एक परंपरा बन चुकी है। उनके डांस ड्रामा अक्सर हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित होते हैं, जिसमें वे शास्त्रीय नृत्य, कहानी और भक्ति को एक साथ पिरोकर देवी के अलग-अलग स्वरूपों को जीवंत करती हैं। इससे दो साल पहले, नवरात्रि के चौथे दिन उन्होंने उत्तर प्रदेश के मथुरा में दो घंटे का डांस ड्रामा प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने मां दुर्गा के विभिन्न रूप दिखाए थे। इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे थे।
पिता की सलाह से शुरू हुआ सफर
हेमा का बैले प्रस्तुतियों की ओर रुझान उनके पिता की सलाह से शुरू हुआ था। समय के साथ वे बड़ी कहानियों को नृत्य के माध्यम से कहने वाली प्रस्तुतियों की ओर बढ़ती गईं। प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक भूषण लाखंडरी द्वारा कोरियोग्राफ की गई “मीरा” नाट्यविहार कला केंद्र की पहली प्रस्तुति बनी, इसके बाद रामचरितमानस पर आधारित “रामायण” का मंचन हुआ। हेमा अपनी बेटियों ईशा और अहाना देओल के साथ “परंपरा” भी प्रस्तुत करती हैं, जिसे वे अपने पारिवारिक कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाने का खास अनुभव बताती हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि नृत्य प्रस्तुति के बाद मिलने वाले संतोष की तुलना फिल्म निर्माण के अनुभव से नहीं की जा सकती।
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